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Thursday, 29 September 2016

(8.7.4) Guru Poornima / Vyas Purnima

Guru Purnima / Vyas Poornima / Importance of Guru Purnima / गुरु पूर्णिमा / व्यास पूर्णिमा / गुरु पूर्णिमा का महत्व 

गुरु तथा गुरु पूर्णिमा का महत्व -
भारतीय संस्कृति में आध्यात्मिक गुरु को बहुत महत्त्व व सम्मान दिया जाता रहा  है। प्राचीन काल में शिक्षा प्राप्ति  के साधन व स्थान सीमित थे। उस समय विद्यार्थी गुरुकुल में जाकर जीवनोपयोगी शिक्षा प्राप्त करते थे तथा गुरु भी अपने विद्यार्थियों को श्रेष्ठ  शिक्षा  करते थे। निम्नांकित श्लोक व दोहा बताते हैं कि गुरु को श्रेष्ठ स्थान प्राप्त था - 
1 गुरुर्ब्रह्मा, गुरुर्विष्णु , गुरुर्देवो महेश्वर:।
  गुरुर्साक्षात परब्रह्म , तस्मै श्री गुरुवे नमः।।
2 गुरु गोविन्द दोऊ खड़े , काकै लागूँ पाय।
  बलिहारी गुरु आपकी , गोविन्द दियो बताये।।
गुरु पूर्णिमा के बारे में महत्वपूर्ण बातें :-
(१ ) गुरु पूर्णिमा या व्यास पूर्णिमा प्रति वर्ष आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा को आयोजित की जाती है।
(२) इस दिन शिष्य गण अपने - अपने गुरु के पास जाते हैं  , उन्हें कुछ भेंट करते हैं  और उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
(३) ऐसा विश्वास है कि महर्षि वेद  व्यास , जिन्होंने कई ग्रंथों की रचना की थी , का जन्म आषाढ़  शुक्ल पूर्णिमा को हुआ था। उनके जन्म दिवस की स्मृति में इस तिथि को गुरु पूर्णिमा या व्यास  पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है। 
(४) चतुर्मास की अवधि भी इसी दिन शुरू होती है। पुरातन समय में सन्यासी अपने शिष्यों  के साथ भ्रमण करते थे और आध्यात्मिक व धार्मिक प्रवचन देते थे। वे चार माह की अवधि में , जिसे चतुर्मास कहा जाता है, किसी एक स्थान पर रुकते थे। 
(५) गौतम बुद्ध ने इस दिन सारनाथ में अपना प्रथम प्रवचन दिया था। इसकी स्मृति में बुद्ध धर्म के अनुयायी गुरु पूर्णिमा मनाते हैं। 

(8.7.3) Magh Purnima / Maghi Poornima

Magh Poornima / Maghi Poornima / Importance of Magh Purnima / माघ पूर्णिमा / माघ पूर्णिमा का महत्व 

माघी पूर्णिमा - 
माघ शुक्ल पूर्णिमा को माघी पूर्णिमा या माघ पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है।
माघी  पूर्णिमा के बारे में महत्वपूर्ण बातें -
माघ मास की पूर्णिमा का धार्मिक दृष्टि से बहुत महत्त्व है।
माघ शुक्ल पूर्णिमा को प्रात: स्नान आदि के बाद विष्णु का पूजन करें, पितरों का श्राद्ध करें, असहायों को भोजन, वस्त्र और आश्रय दें, तिल, कम्बल, कपास, गुड़, घी, मोदक, फल और सामर्थ्य  का दान करें।
व्रत या उपवास करें, कथा सुने और ब्राह्मणों को भोजन कराये।  यह अत्यंत फलदायी होते हैं।
इस तिथि को गंगा स्नान या अन्य पवित्र नदी या जलाशय में स्नान करने से भव बाधाएं दूर हो जाती हैं। वैसे तो माघ स्नान तीस दिन में पूर्ण होता है , परंतु  इतना नहीं कर सके तो माघ शुक्ल त्रयोदशी, चतुर्दशी और पूर्णिमा के अरूणोदय स्नान करके व्रत करे तो सम्पूर्ण माघ स्नान का फल मिलता है।
माघ शुक्ल पूर्णिमा को को मेष का शनि, सिंह के गुरु -चन्द्र और श्रवण का सूर्य हो तो इनके सहयोग से महामाघी संपन्न होती है।  इसमें स्नान दान आदि जो भी किये जायें , उनका अमित फल मिलता है।  

(8.7.1) Poornima Tithi / Purnima Ka Mahatva/ Importance of Purnima

Purnima Tithi ka Kya Mahatv Hai ? Importance of Poornima in Hinduism / पूर्णिमा तिथि / पूर्णिमा का महत्त्व

पूर्णिमा तिथि के बारे में महत्वपूर्ण बातें -
पूर्णिमा तिथि हिन्दू धर्म में शुभ तिथि मानी जाती है।
प्रत्येक माह के शुक्ल पक्ष के अंतिम दिन को पूर्णिमा कहा जाता है।
एक वर्ष में बारह बार पूर्णिमा तिथि आती है।  जिस वर्ष अधिक मास हो, उसमें तेरह बार पूर्णिमा आती हैं।
पूर्णिमा का स्वामी चन्द्रमा है।
पूर्णिमा को पूर्णा तिथि माना जाता है।
पूर्णिमा का व्रत सभी प्रकार के सुख तथा सम्पदा दिलाने वाला माना जाता है।
मास वार पूर्णिमा तथा उनका महत्व -
चैत्री पूर्णिमा - इस दिन हनुमान जी का जन्म मनाया जाता है। इसी दिन वैसाख स्नान प्रारम्भ होते हैं।
वैसाखी पूर्णिमा - इस पूर्णिमा को बुद्ध जयन्ती मनाई जाती है।  इस पूर्णिमा को पीपल पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। वैसाख स्नान पूर्ण होता है।
ज्येष्ठ पूर्णिमा - इस दिन  सावित्री व्रत (पूर्णिमा पक्ष ) किया जाता है।
आषाढ़ पूर्णिमा - इसे व्यास जयंती तथा गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है।
श्रावण पूर्णिमा - इस दिन रक्षा बंधन का त्यौंहार मनाया जाता है।  पितृ तर्पण तथा ऋषि पूजन किया जाता है।
भाद्रपद पूर्णिमा - इस दिन से श्राद्ध पक्ष प्रारम्भ होता है।
आश्विन पूर्णिमा -  इसे शरद पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है।
कार्तिक पूर्णिमा - भीष्म पंचक व्रत तथा कार्तिक स्नान पूर्ण होता है।
मार्गशीर्ष पूर्णिमा -
पौष पूर्णिमा - माघ स्नान प्रारम्भ होता है।
माघ पूर्णिमा - माघ स्नान पूर्ण होता है।
फाल्गुन पूर्णिमा - होली पर्व।  होलिका दहन किया जाता है। होलाष्टक पूर्ण होते हैं।