Saturday, 4 April 2026

(2.4.5) सात उपयोगी बातें Seven Useful Things

सात उपयोगी बातें Seven Useful Things

(पहली) भविष्य उनका है, जो अपने सपनों की सुंदरता में विश्वास रखते हैं और भविष्य उनका भी है, जो आज उसके लिए तैयारी करते हैं।

(दूसरी) गति से ज्यादा दिशा मायने रखती है।

(तीसरी) ज्ञानी का मार्ग कर्म करना है, प्रतिस्पर्धा नहीं।

(चौथी) अंधकार प्रकाश का अभाव है और अहंकार जागरूकता का अभाव है।

(पांचवी) खुशी से यात्रा करना, गंतव्य स्थान पर पहुंचने से बेहतर है।

(छठी) मुस्कुराहट अच्छे रिश्ते का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

(सातवीं) अच्छा करने का प्रयास करना महत्वपूर्ण है, परंतु उससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण है, बुराई से दूर रहने का प्रयास करना। 

(2.4.4) आत्मविश्वासी लोगों की सात विशेषताएं Seven Qualities of Confident People

आत्मविश्वासी लोगों की सात विशेषताएं Seven Qualities of Confident People

(पहली) वे लोगों से आंखों में आंखें डाल कर बात करते हैं।

(दूसरी) उन्हें दूसरों से मान्यता की आवश्यकता नहीं होती है।

(तीसरी) वे अपनी गलतियों को स्वीकार करने से डरते नहीं है, बल्कि वे उनसे कुछ न कुछ नया सीखते हैं।

(चौथी) वे अपनी ताकत और कमजोरी को जानते हैं।

(पांचवी) वे बदलाव को स्वीकार करते हैं और चुनौतियों को अवसर के रूप में देखते हैं।

(छठी) वे फायदे और नुकसान का आकलन कर लेते हैं और जोखिम उठाने से डरते नहीं है।

(सातवीं) वे बोलते कम और सुनते ज्यादा हैं।

 

(2.4.3) सफल व्यक्तियों की आदतें Habits of Successful People

सफल व्यक्तियों की आदतें Habits of Successful People

वे प्रातः काल जल्दी उठते हैं।

वे प्रतिदिन नया पढ़ते हैं और कुछ नया सीखते हैं।

वे जिम्मेदारी लेते हैं और उसे पूरी तरह निभाते भी हैं।

वे गलती को स्वीकार करते हैं और दूसरों पर दोषारोपण नहीं करते हैं।

वे बहाने बाजी नहीं करते हैं।

वे आज के काम को कल पर नहीं टालते हैं।

वे आत्म अनुशासित होते हैं।

वे सोच समझकर किसी कार्य को शुरू करते हैं और फिर उसे बीच में नहीं छोड़ते हैं।

वे समस्या से घबराते नहीं हैं, बल्कि वे इसका कोई न कोई समाधान निकाल लेते हैं।

वे अपनी प्रशंसा और प्रोत्साहन सुनकर भी निरपेक्ष रहते हैं और हमेशा अपना संतुलन बनाए रखते हैं।

वे आलोचना को भी सकारात्मक ढंग से स्वीकार करते हैं।

वे समय का मूल्य समझते हैं, इसलिए वे इसका प्रबंधन करते हैं और इसे रचनात्मक कार्यों में लगाते हैं।

Friday, 3 April 2026

(2.4.2) आदर्श दिनचर्या An Ideal Daily Routine / What is an Ideal Daily Routine

 आदर्श दिनचर्या An Ideal Daily Routine

प्रातः काल उठने से लेकर रात को सोने तक किए जाने वाले कार्यों को सामूहिक रूप से दिनचर्या कहा जाता है। एक आदर्श दिनचर्या वह है, जो व्यक्ति में शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक संतुलन बनाए रखे।

स्वस्थ मनुष्य की दिनचर्या में शामिल है, प्रातः काल चार से पांच बजे के बीच उठ जाना, हल्का व्यायाम या प्रातः भ्रमण करना, समय पर नाश्ता और दोनों समय संतुलित भोजन करना, दिन में अपने व्यवसाय से संबंधित कार्य को करना, रात का भोजन हल्का हो और इसे सोने से कम से कम दो घंटे पहले खा लेना। रात में 10:00 बजे तक सो जाना यानि कम से कम 6 या 7 घंटे की नींद लेना आवश्यक है।

दिन चर्या के लिये सुझाव -

प्रातः काल नींद खुलते ही दोनों हाथों की हथेलियों को देखते हुए यह श्लोक बोलें -

कराग्रे वसते लक्ष्मी: , कर मध्य सरस्वती।

कर मूले स्थितो ब्रह्मा, प्रभाते कर दर्शनम् ।।

अर्थात - हाथ के अग्रभाग में लक्ष्मी, हाथ के मध्य में सरस्वती और हाथ के मूल भाग में ब्रह्मा जी निवास करते हैं, अतः प्रातः काल दोनों हाथों का अवलोकन करना चाहिए।

दैनिक कार्य से निवृत होने के बाद निम्नांकित मंत्रों का कम से कम 11 बार जप करें (ज्यादा कर सको तो और अच्छा ) -

(पहला) गायत्री मंत्र -

ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्

(दूसरा) शिव मंत्र -

ॐ नमः शिवाय शुभं शुभं कुरु कुरु शिवाय नमः ॐ

(तीसरा) सूर्यदेव का एकाक्षरी बीज मंत्र -

यह मंत्र इस प्रकार है - ॐ घृणि: सूर्याय नमः

इसके बाद मन में निम्नांकित संकल्प दो तीन बार दोहराओ -

Day by day in every way, through the grace of God, I am getting better and better.

इसके बाद जो भी अपना दिन भर का कार्य है, उसे उत्साह और प्रसन्नता के साथ करो।

रात्रि में सोने से पहले किए जाने वाले कार्य -

सोने से पहले बिस्तर पर बैठ कर या लेटकर गायत्री मंत्र और शिव मंत्र का ग्यारह - ग्यारह बार जप करो। और फिर ईश्वर से यह प्रार्थना करें,  हे ईश्वर मुझे और मेरे परिवार को अच्छी नींद और सुरक्षा प्रदान करो और कल के लिए नई ऊर्जा दो। फिर  ॐ शान्ति, शान्ति, शान्तिबोल कर सो जाओ।

 

Tuesday, 24 February 2026

(7.3.6) होलाष्टक क्या होते हैं /होलाष्टक में क्या करें क्या नहीं करें Holashtak Kya Hote Hain? Holashtak Me Kya Karen

 होलाष्टक क्या होते हैं होलाष्टक में क्या करें क्या नहीं करें Holashtak Kya Hote Hain? Holashtak Me Kya Karen
होलाष्टक क्या होते हैं ? होलाष्टक किसे कहते हैं

होली हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योंहार है.फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को होलिका दहन किया जाता है. पूर्णिमा से आठ दिन पूर्व यानि फाल्गुन शुक्ल पक्ष की अष्टमी से लेकर पूर्णिमा तक की आठ दिन की अवधि होलाष्टक कहलाती है यानि होलाष्टक अष्टमी तिथि को शुरू होते हैं और होलिका दहन के साथ ही समाप्त हो जाते हैं.

होलाष्टक को अशुभ काल या अशुद्ध कालांश माना जाता है. इसलिए इस अवधि में कोई भी शुभ कार्य नहीं किये जाते हैं.

होलाष्टक में वर्जित कार्य इस प्रकार हैं - 

किसी भी उद्देश्य के लिए भवन का निर्माण करना.

गृह प्रवेश करना.       

सगाई अथवा विवाह करना.

वाहन क्रय करना.

कुआ, जलाशय आदि खुदवाना,

मुंडन संस्कार करना.

किसी भी व्रत का आरम्भ और उद्यापन करना.

नव विवाहिता वधु का प्रवेश.

देव प्रतिमा की स्थापना करना.

यज्ञोपवीत संस्कार.

मन्त्र दीक्षा लेना.

कर्ण वेध.

आदि कार्य नहीं करने चाहिए.

लेकिन जो कार्य पहले शुरू किये जा चुके हैं, उन कार्यों को जारी रखा जा सकता है. नित्य एवं नैमित्तिक कर्म किये जा सकते हैं. इनके अतिरिक्त सूतिका स्नान आदि कार्य जिनकी अवधि निश्चित होती है वे कार्य किये जा सकते हैं.  

 

(7.2.6) मुण्डन संस्कार / चौलकर्म संस्कार का मुहूर्त Mundan Sanskar Muhurta, Chaulkarm Sanskar, Chuda Karm Sanskar

 मुण्डन संस्कार / चौलकर्म संस्कार का मुहूर्त Mundan Sanskar Muhurta, Chaulkarm Sanskar, Chuda Karm Sanskar

चौल कर्म संस्कार या चूड़ा कर्म संस्कार जिसे मुंडन संस्कार भी कहा जाता है, 16 संस्कारों में से एक प्रमुख संस्कार है। बालक के जन्म के पहले, तीसरे, पांचवें या सातवें इत्यादि विषम वर्षों में उत्तरायण के सूर्य में जातक का मुण्डन संस्कार किया जाता है।

इस मुहूर्त के लिए ग्राह्य मास इस प्रकार हैं -

वैशाख, ज्येष्ठ (लेकिन प्रथम गर्भ से ज्येष्ठ में जन्मे बालक का ज्येष्ठ के महिने में मुंडन निषेध है), आषाढ़ (शुक्ल पक्ष एकादशी से पूर्व), माघ तथा फाल्गुन।

इस मुहूर्त के लिए ग्राह्य तिथियाँ इस प्रकार हैं  -

दोनों पक्षों की द्वितीया, तृतीया,पंचमी,  सप्तमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी और त्रयोदशी तथा कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथियां ग्राह्य हैं।

मुंडन के मुहूर्त के लिए ग्राह्य वार हैं - सोमवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार।

इन वारों के अतिरिक्त ब्राह्मणों के लिए रविवार, क्षत्रियों के लिए मंगलवार तथा वैश्यों के लिए शनिवार भी शुभ माने गए हैं।

इस मुहूर्त के लिए ग्राह्य नक्षत्र हैं - अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, चित्रा, स्वाती, ज्येष्ठा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा और रेवती।

Friday, 20 February 2026

(2.3.15) नेपोलियन बोनापार्ट और आल्प्स पर्वत Napoleon aur Alps Parvat / Napoleon crossed Alps Mountain

नेपोलियन बोनापार्ट और आल्प्स पर्वत Napoleon aur Alps Parvat / Napoleon crossed Alps Mountain

विश्व के इतिहास में नेपोलियन को महान सेनापतियों में से एक माना जाता है। वह किसी भी काम को असंभव नहीं मानता था। वह जीवन भर जोखिम भरे काम करता रहा। एक बार उसने आल्प्स पर्वत को पार करने का निश्चय किया और अपनी सेना के साथ पर्वत को पार करने के लिए चल पड़ा।

पहाड़ी मार्ग में उसे एक बूढी औरत मिली। उसने कहा, “नेपोलियन यह तुम कौन सा सपना देख कर आए हो? आज तक न जाने कितने शासक आल्प्स को पार करने के लिए तत्पर हुए, लेकिन हर कोई यहाँ से लौटकर गया है। वे एक पहाड़ी भी पार नहीं कर पाए। तुम्हारे पास तो इतना दलबल है। तुम इतनी पहाड़ियों को कैसे पार कर पाओगे? मेरा कहना मानो और यही से वापस चले जाओ।

नेपोलियन ने बूढ़ी औरत से कहा, “आपने यह कहकर मेरा उत्साह दुगना कर दिया है।

उसने आगे कहा, “नेपोलियन के सामने इस दुनिया का कोई भी आल्प्स ऐसा नहीं है, जिसे नेपोलियन चाहे और पार ना कर सके। मैं इसे अवश्य पार करूंगा। मेरे लिए असंभव जैसा कुछ नहीं है।

बूढी औरत ने नेपोलियन को ऊपर से नीचे तक ध्यान से देखा। उसकी आंखों की चमक तथा चेहरे पर आए हुए आत्मविश्वास को देख कर कहा,” नेपोलियन, मैं इन पहाड़ों की देवी हूँ और इनकी रक्षा करती हूँ। अब तक शासक तो बहुत आए पर जो आत्मविश्वास, जो मनोबल, जो सुदृढ़ मानसिकता मुझे तुम्हारे भीतर दिखाई दी, वह अब तक और किसी शासक के भीतर दिखाई नहीं दी। आओ, मैं तुम्हारा अभिनंदन करती हूँ और तुम्हारी मदद करती हूँ।

नेपोलियन बोनापार्ट ने आत्म विश्वास और दृढ़ मानसिकता के बल पर अपनी सेना के साथ आल्प्स पर्वत को सफलतापूर्वक पार किया।

शिक्षा - इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि यदि किसी कार्य को आत्मविश्वास, मनोबल और  दृढ़ मानसिकता के साथ शुरू किया जाए, तो उसमें सफलता अवश्य मिलती है। 

 https://www.youtube.com/watch?v=-96mEZwyu0s

Saturday, 14 February 2026

(6.1.15) देव शयन काल क्या होता है? हरि शयनकाल कब शुरू होता है Dev Shayan Kaal /Hari Shayan Kaal Kya Hota Hai ?

देव शयन काल क्या होता है? हरि शयनकाल कब शुरू होता है Dev Shayan Kaal /Hari Shayan  Kaal  Kya Hota Hai ? 

पौराणिक कथा के अनुसार जब श्री हरिविष्णु ने वामन रूप में अवतार धारण किया और चक्रवर्ती सम्राट राजा बलि के पास तीन कदम धरती यज्ञ के लिए दान में मांगने गए, तब राजा बलि के द्वारा तीन कदम धरती दान में देने के उपरांत श्री हरि विष्णु ने पहले कदम में संपूर्ण धरती, आकाश और पाताल को नाप लिया। दूसरे कदम में ब्रह्म लोक, देवलोक और संपूर्ण ब्रह्मांड को नाप लिया और तीसरा पग रखने के लिए राजा बलि से पूछा कि तीसरा पग कहां रखूंतो राजा बलि ने तीसरा पग अपने सिर पर रखने को कहा, ताकि उका दान वचन संकल्प पूरा हो सके। तब श्री हरि विष्णु ने तीसरा पग राजा बलि के सिर पर रखा। जिसके प्रभाव से राजा बलि का पाताल लोक में गमन हो गया।

इस पर श्री हरि विष्णु ने राजा बलि को पाताल लोक का राजा घोषित कर दिया और आशीर्वाद दिया वे स्वयं उके राज्य की रक्षा करेंगे। जिस समय भगवान विष्णु 4 माह के लिए क्षीर सागर में योग निद्रा में चले जाते हैं, तो उनका एक रूप राजा बलि को दिए हुए वचन को पूरा करने के लिये भी रहता है।

इन्हीं 4 माह की योग निद्रा को चातुर्मास कहा जाता है। और यही चार माह की अवधि देव शयन काल या हरि शयन काल कहलाती है।

हिंदू पंचांग के अनुसार यह चार माह की अवधि आषाढ़ शुक्ल एकादशी, जिसे देवशयनी एकादशी भी कहा जाता हैसे शुरू होकर कार्तिक शुक्ल एकादशी जिसे देव प्रबोधिनी एकादशी कहा जाता है, तक रहती है। देवशयन काल में विवाह, यज्ञोपवीत, मुण्डन आदि शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं। लेकिन गृह प्रवेश करना, किसी भवन का निर्माण शुरू करना, वाहन खरीदना आदि कार्य किये जा सकते हैं।