अधिक मास नहीं हो तो क्या होगा What will happen if there is no Adhik Maas अधिक मास महत्व क्या है
सनातन पंचांग की काल गणना के अनुसार मास दो प्रकार के होते
हैं, जिनके नाम है चंद्र मास और सौर मास। चंद्र मास, चंद्रमा की गति पर आधारित होता है और सौर मास, सूर्य की गति पर आधारित होता है।
एक अमावस्या से अगली अमावस्या या एक पूर्णिमा से अगली
पूर्णिमा के बीच की अवधि को एक चंद्र मास कहा जाता है। बारह चंद्रमास की अवधि को
एक चंद्रवर्ष कहा जाता है।
सूर्य एक राशि पर 1 महीने तक रहता है।
सूर्य के एक राशि पर रहने की अवधि को सौर मास कहा जाता है। और 12 सौर मास की अवधि को एक सौर वर्ष कहा जाता है।
एक चंद्र वर्ष में 354 दिन होते हैं और एक
सौर वर्ष में 365 दिन होते हैं। इस तरह दोनों वर्षों के बीच 1 वर्ष में 11 दिन का अंतर आ जाता है।
चंद्र वर्ष और सौर वर्ष के बीच आए इन ग्यारह दिनों के अंतर को समाप्त करने के लिए 3 साल में अधिक मास की व्यवस्था की गई है।
अधिक मास नहीं हो, तो क्या होगा?
हिंदू धर्म में सभी पर्व ऋतु के आधार पर मनाए जाते हैं। यदि
अधिक मास नहीं आए तो त्यौहार और ऋतुओं के बीच तालमेल नहीं रहेगा। प्रत्येक त्यौहार
प्रतिवर्ष 11 दिन पीछे हट जाएगा। और हर तीन साल में सारे त्योहार एक
महीने पीछे आएंगे। इस प्रकार लंबी अवधि
में जो त्यौहार वर्षा ऋतु में आता है वह धीरे-धीरे ग्रीष्म ऋतु या शीत ऋतु में आने
लगेगा।
उदाहरण के लिए शीत ऋतु की समाप्ति पर आने वाला बसंत पंचमी
का पर्व माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। यदि अधिक मास न हो, तो यह पंचमी का पर्व प्रतिवर्ष 11 दिन पहले आने
लगेगा। परिणाम स्वरूप यह वर्षा ऋतु में और ग्रीष्म ऋतु में भी आने लगेगा। जिससे
ऋतुओं और त्योहारों के बीच सामंजस्य नहीं रहेगा।
इसी तरह के तालमेल को बिठाने के लिए ग्रेगोरियन कैलेंडर में
भी प्रत्येक चौथे वर्ष फरवरी के महीने में एक दिन बढ़ा कर 28 दिन के बजाय 29 दिन कर दिए जाते हैं। इस
वर्ष को लीप यीयर कहा जाता है।
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