(2.3.9) कर्तव्य और भावना Kartvya Aur Bhawana An Inspirational Story/ Motivational Story
कर्तव्य और भावना Kartvya Aur Bhawana An Inspirational Story/ Motivational
Story
कर्तव्य और भावना
प्राचीन समय की बात है। चीन में एक धनवान व्यक्ति रहता था। उसका व्यवसाय
था, भेड़ पालन करना। एक बार उसने भेड़ों को चराने और
उनकी देखभाल करने के लिए दो लड़के रख लिए और दोनों लड़कों को आधी आधी भेड़ें बाँट
दी। कुछ समय तक तो सब ठीक चलता रहा परंतु धीरे-धीरे भेड़ें दुबली होती गई और उनमें
से कुछ तो मर भी गई। उसने जाँच की कि यह सब कैसे और क्यों हुआ?
उसे ज्ञात हुआ कि दोनों लड़के भेड़ों की देखभाल करने के बजाय अपने-अपने
व्यसनों में लगे हुए हैं। उनमें से एक लड़के को जुआ खेलने की आदत थी, उसे जब भी मौका मिलता, वह भेड़ों को छोड़कर जुआ खेलने के लिए जा बैठता था। भेड़ें कहीं से कहीं
पहुँच जाती थी और भूखी प्यासी कष्ट पाती थी। यही बात दूसरे लड़के के साथ भी थी, वह पूजा पाठ करने का आदी था। वह पूजा पाठ करता था और भेड़ों
पर ध्यान नहीं देता था।
दोनों लड़के कर्तव्य पालन की उपेक्षा करते हुए पकड़े गए। उन्हें न्यायाधीश
के सामने प्रस्तुत किया गया। दोनों के कार्य और कारणों में अन्तर था, परंतु कर्तव्य पालन की उपेक्षा करने के लिए दोनों समान रूप से
दोषी थे। न्यायाधीश ने दोनों को समान रूप से दंडित किया और कहा कि कर्तव्य की
उपेक्षा करके, जो भी कुछ किया जाता है वह व्यसन ही है, व्यसन में चाहे जुआ खेला हो चाहे पूजा पाठ किया हो। कर्तव्य
की अपेक्षा तो दोनों में ही है। इसलिए वे दोनों ही समान रूप से दंड के भागी हैं।
शिक्षा - इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है कि कर्तव्य भावना से बड़ा होता
है। कर्तव्य की उपेक्षा करके दूसरा कोई भी कार्य किया जाए, चाहे वह कितना भी अच्छा क्यों न हो, व्यसन ही माना जाएगा।