जीवन का आनन्द दृष्टिकोण में है – प्रेरक कहानी Motivational Story / Inspirational
Story
जीवन का आनंद और दृष्टिकोण
किसी स्थान पर एक विशाल मंदिर के निर्माण का कार्य चल रहा था। वहाँ से
गुजर रहे एक संत ने देखा कि निर्माण कार्य के लिए तीन मजदूर धूप में बैठे हुए
पत्थर तोड़ रहे हैं। संत ने उनसे पूछा “तुम क्या कर रहे
हो?” एक मजदूर ने दुःखी मन से उत्तर दिया, “आप देख नहीं रहे हो? मैं पत्थर तोड़
रहा हूं।” वह उत्तर देकर फिर से बुझे मन से पत्थर तोड़ने
लगा।
तभी उस संत की ओर देखते हुए दूसरे मजदूर ने कहा, “बाबा, यह तो रोजी-रोटी है। मैं तो यह काम करके बस अपनी
आजीविका कमा रहा हूं।” उत्तर देकर वह भी अपने काम
में लग गया। लेकिन उत्तर देते समय उस मजदूर के चेहरे पर न तो दुख का भाव था और न
आनंद का।
तभी संत ने अपने प्रश्न का उत्तर पाने की इच्छा से तीसरे मजदूर की तरफ
देखा। तीसरे मजदूर के चेहरे पर आनंद का भाव था और आंखों में चमक थी। उसने उत्तर
दिया “बाबा जी, यहाँ देवी मां का
मंदिर बन रहा है। मंदिर में लोग देवी के दर्शन करके आनंदित होंगे। मैं यही सोच कर
इस मंदिर के निर्माण कार्य में सहयोग कर रहा हूं।”
इन तीनों मजदूरों की बात सुनकर संत भाव - समाधि में डूब गए। सचमुच जीवन तो
वही है, पर दृष्टिकोण भिन्न होने से सब कुछ बदल जाता है।
दृष्टिकोण के भेद से फूल काँटे हो जाते हैं और कांटे फूल हो जाते हैं। आनंद अनुभव
करने का दृष्टिकोण जिसने पा लिया, उसके जीवन में
आनंद के सिवा और कुछ नहीं रहता है।
शिक्षा - इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि जीवन का आनंद किसी वस्तु
या परिस्थिति में नहीं है, बल्कि जीने वाले
के दृष्टिकोण में है। स्वयं अपने आप में है। हमको क्या मिला है उसमें नहीं, बल्कि हम उसे पाकर कैसा अनुभव करते हैं? उसे किस तरह से लेते हैं? उसमें है। यही वजह है कि एक ही वस्तु या स्थिति दो भिन्न दृष्टिकोण वाले
व्यक्तियों के लिए अलग-अलग अर्थ रखती है। एक को उसमें आनंद की अनुभूति होती है और
दूसरे को विषाद की।