आदर्श दिनचर्या An Ideal Daily Routine
प्रातः काल उठने से लेकर रात को सोने तक किए जाने वाले
कार्यों को सामूहिक रूप से दिनचर्या कहा जाता है। एक आदर्श दिनचर्या वह है, जो व्यक्ति में शारीरिक, मानसिक और
आध्यात्मिक संतुलन बनाए रखे।
स्वस्थ मनुष्य की दिनचर्या में शामिल है, प्रातः काल चार से पांच बजे के बीच उठ जाना, हल्का व्यायाम या प्रातः भ्रमण करना, समय पर नाश्ता और
दोनों समय संतुलित भोजन करना, दिन में अपने व्यवसाय से
संबंधित कार्य को करना, रात का भोजन हल्का हो और इसे
सोने से कम से कम दो घंटे पहले खा लेना। रात में 10:00 बजे तक सो जाना
यानि कम से कम 6 या 7 घंटे की नींद लेना आवश्यक
है।
दिन चर्या के लिये सुझाव -
प्रातः काल नींद खुलते ही दोनों हाथों की हथेलियों को देखते
हुए यह श्लोक बोलें -
कराग्रे वसते लक्ष्मी: , कर मध्य सरस्वती।
कर मूले स्थितो ब्रह्मा, प्रभाते कर दर्शनम्
।।
अर्थात - हाथ के अग्रभाग में लक्ष्मी, हाथ के मध्य में सरस्वती और हाथ के मूल भाग में ब्रह्मा जी
निवास करते हैं, अतः प्रातः काल दोनों हाथों का अवलोकन करना चाहिए।
दैनिक कार्य से निवृत होने के बाद निम्नांकित मंत्रों का कम
से कम 11 बार जप करें (ज्यादा कर सको तो और अच्छा ) -
(पहला) गायत्री मंत्र -
ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो
यो न: प्रचोदयात्
(दूसरा) शिव मंत्र -
“ॐ नमः शिवाय शुभं शुभं कुरु
कुरु शिवाय नमः ॐ ”
(तीसरा) सूर्यदेव का
एकाक्षरी बीज मंत्र -
यह मंत्र इस प्रकार है - ॐ घृणि: सूर्याय नमः
इसके बाद मन में निम्नांकित संकल्प दो तीन बार दोहराओ -
Day by
day in every way, through the grace of God, I am getting better and better.
इसके बाद जो भी अपना दिन भर का कार्य है, उसे उत्साह और प्रसन्नता के साथ करो।
रात्रि में सोने से पहले किए जाने वाले कार्य -
सोने से पहले बिस्तर पर बैठ कर या लेटकर गायत्री मंत्र और
शिव मंत्र का ग्यारह - ग्यारह बार जप करो। और फिर ईश्वर से यह प्रार्थना करें, “हे ईश्वर मुझे और मेरे
परिवार को अच्छी नींद और सुरक्षा प्रदान करो और कल के लिए नई ऊर्जा दो।” फिर “ॐ शान्ति, शान्ति, शान्ति” बोल कर सो जाओ।