Saturday, 17 January 2026

(2.3.12) ईश्वर किसकी सहायता करते हैं? प्रेरक कहानी Inspirational Story/ Motivational Story

ईश्वर किन लोगों की सहायता करते हैं? प्रेरक कहानी Inspirational and motivational story

ईश्वर किसकी सहायता करते हैं?

एक व्यक्ति हनुमानजी का भक्त था। एक बार वह अपनी बैलगाड़ी से कहीं जा रहा था। उसकी गाड़ी एक दलदल में फंस गई। वह हनुमान-चालीसा का पाठ करने लगा और यह अपेक्षा करने लगा कि हनुमानजी की कृपा से उसकी बैलगाड़ी दलदल से बाहर निकल आएगी।

संयोग से उसी समय एक पंडित जी वहाँ से गुजर रहे थे। जब उन्होनें यह सब देखा, तो वे वास्तविकता को समझ गए और उन्होंने उस व्यक्ति को याद दिलाया, "मित्र, हनुमानजी को भी संजीवनी बूटी का सही स्थान पता नहीं था, इसलिए वे पूरा पहाड़ ही उठा लाए थे। तुम्हें कम से कम अपनी गाड़ी को धक्का देने का प्रयास तो करना चाहिए।"

उस व्यक्ति ने वैसा ही किया और उसकी इस छोटी सी सहायता से बैलों ने भी जोर लगाया और गाड़ी को बाहर खींच लिया।

शिक्षा - इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि ईश्वर उनकी सहायता करते हैं, जो स्वयं अपनी सहायता करते हैं। जो लोग यह सोचते हैं कि ईश्वर उनके लिए सब कुछ कर देंगे, तो उन्हें जाग जाना चाहिए और कड़ी मेहनत शुरू कर देनी चाहिए। उन्हें जान लेना चाहिए कि ईश्वर की शक्ति, स्वयं की शक्ति की ही पूरक है।

Friday, 16 January 2026

(2.3.11) ईश्वर की सहायता / Ishwar ki Sahayata / Inspirational Story/ motional Story

ईश्वर किस प्रकार सहायता करते हैं An inspirational story / Motivational Story

ईश्वर किस प्रकार सहायता करते हैं?

किसी गांव में एक व्यक्ति रहता था। वह भक्त था और ईश्वर पर बहुत आस्था और विश्वास रखता था। उसका मानना था कि ईश्वर सब की सहायता करते हैं।

एक बार तेज बरसात हो गई जिसके कारण उसके गाँव के पास से बहने वाली नदी का पानी उसके गाँव में घुस गया। जिला प्रशासन की ओर से सहायता करने वाले कर्मचारी आए और गाँव के लोगों को अपने घर खाली करके सुरक्षित स्थान पर चलने के लिए कहा। गाँव के लोग अपने घरों को खाली करने लगे और आवश्यकता का सामान अपने साथ लेकर किसी सुरक्षित स्थान की ओर जाने लगे। लेकिन वह भक्त अपने घर के सामने ही खड़ा रहा। उसने अपना घर खाली नहीं किया। तब प्रशासन के लोगों ने उस व्यक्ति से कहा कि नदी का पानी घरों में घुस सकता है। तुम हमारे साथ सुरक्षित स्थान पर चलो। लेकिन उसने यह कह कर उनके साथ जाने से मना कर दिया कि मुझे विश्वास है, ईश्वर मेरी सहायता करने अवश्य आयेंगे और मुझे बचा लेंगे।

नदी का पानी तेजी से बढ़ता हुआ उस भक्त के घर के पास तक पहुंच गया। कुछ समय बाद एक नाव वहाँ पहुँची और उसमें बैठे हुए लोगों ने उस व्यक्ति से कहा,”पानी का बहाव तेज है, तुम हमारे साथ आओ, हम तुम्हें सुरक्षित स्थान पर ले चलेंगे।उसने इस बार भी उनके साथ जाने से इंकार कर दिया और कहा कि ईश्वर मुझे बचाने जरुर आयेंगे। जब पानी उस व्यक्ति के घर में चला गया, तो वह घर की छत पर चढ़ गया और प्रतीक्षा करने लगा कि भगवान उसे बचाने आएंगे।

थोड़ी देर बाद एक बचाव दल हेलीकॉप्टर से आया और नीचे रस्सी डाल कर उस व्यक्ति से कहा कि तुम यह रस्सी पकड़ लो और ऊपर आ जाओ। इस बार भी उस व्यक्ति ने दोहराया कि तुम लोग जाओ, मुझे तो ईश्वर बचाने आएंगे। आखिरकार पानी इतना बढ़ गया कि वह व्यक्ति पानी में डूब गया और मर गया।

मरने के बाद वह ईश्वर के पास पहुंचा और ईश्वर पर चिल्लाते हुए कहा कि मैं आपका बहुत बड़ा भक्त हूँ। मुझे पूरा विश्वास था कि आप मुझे बचाने अवश्य आएंगे। मैं प्रतीक्षा करता रहा और आप नहीं आए। अब आप पर कौन  विश्वास करेगा और क्यों कोई आपकी भक्ति करेगा? इस पर ईश्वर ने कहा कि मैंने तुम्हें बचाने के लिए तीन बार प्रयास किया, लेकिन तुम स्वयं ही बचना नहीं चाहते थे। पहली बार मैंने तुम्हें बचाने के लिए प्रशासन के लोग भेजे। दूसरी बार मैंने तुम्हारी रक्षा के लिए एक नाव भेजी। तीसरी बार मैंने तुम्हारे लिए हेलीकॉप्टर भेजा। फिर भी तुम मेरी सहायता को समझ नहीं सके। याद रखो, मैं किसी माध्यम से सहायता करता हूँ।

शिक्षा -  इस कहानी से हमें शिक्षा मिलती है कि ईश्वर जिसकी सहायता करना चाहते हैं, वे उस व्यक्ति के लिए सहायता का कोई न कोई माध्यम बना देते हैं। बस आवश्यकता है, उन दिव्य संकेतों को समझने की।


Wednesday, 14 January 2026

(2.3.10) जीवन का आनंद और दृष्टिकोण (प्रेरक कहानी) Jivan Ka Anand Aur Drishtikon (Motivational Story / Inspirational Story)

जीवन का आनन्द दृष्टिकोण में है – प्रेरक कहानी Motivational Story / Inspirational Story

जीवन का आनंद और दृष्टिकोण

किसी स्थान पर एक विशाल मंदिर के निर्माण का कार्य चल रहा था। वहाँ से गुजर रहे एक संत ने देखा कि निर्माण कार्य के लिए तीन मजदूर धूप में बैठे हुए पत्थर तोड़ रहे हैं। संत ने उनसे पूछा तुम क्या कर रहे हो?” एक मजदूर ने दुःखी मन से उत्तर दिया, “आप देख नहीं रहे हो? मैं पत्थर तोड़ रहा हूं।वह उत्तर देकर फिर से बुझे मन से पत्थर तोड़ने लगा।

तभी उस संत की ओर देखते हुए दूसरे मजदूर ने कहा, “बाबा, यह तो रोजी-रोटी है। मैं तो यह काम करके बस अपनी आजीविका कमा रहा हूं।उत्तर देकर वह भी अपने काम में लग गया। लेकिन उत्तर देते समय उस मजदूर के चेहरे पर न तो दुख का भाव था और न आनंद का।

तभी संत ने अपने प्रश्न का उत्तर पाने की इच्छा से तीसरे मजदूर की तरफ देखा। तीसरे मजदूर के चेहरे पर आनंद का भाव था और आंखों में चमक थी। उसने उत्तर दिया बाबा जी, यहाँ देवी मां का मंदिर बन रहा है। मंदिर में लोग देवी के दर्शन करके आनंदित होंगे। मैं यही सोच कर इस मंदिर के निर्माण कार्य में सहयोग कर रहा हूं।

इन तीनों मजदूरों की बात सुनकर संत भाव - समाधि में डूब गए। सचमुच जीवन तो वही है, पर दृष्टिकोण भिन्न होने से सब कुछ बदल जाता है। दृष्टिकोण के भेद से फूल काँटे हो जाते हैं और कांटे फूल हो जाते हैं। आनंद अनुभव करने का दृष्टिकोण जिसने पा लिया, उसके जीवन में आनंद के सिवा और कुछ नहीं रहता है।

शिक्षा - इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि जीवन का आनंद किसी वस्तु या परिस्थिति में नहीं है, बल्कि जीने वाले के दृष्टिकोण में है। स्वयं अपने आप में है। हमको क्या मिला है उसमें नहीं, बल्कि हम उसे पाकर कैसा अनुभव करते हैं? उसे किस तरह से लेते हैं? उसमें है। यही वजह है कि एक ही वस्तु या स्थिति दो भिन्न दृष्टिकोण वाले व्यक्तियों के लिए अलग-अलग अर्थ रखती है। एक को उसमें आनंद की अनुभूति होती है और दूसरे को विषाद की।

Sunday, 11 January 2026

(2.3.9) कर्तव्य और भावना Kartvya Aur Bhawana An Inspirational Story/ Motivational Story

 कर्तव्य और भावना Kartvya Aur Bhawana An Inspirational Story/ Motivational Story  

कर्तव्य और भावना 

प्राचीन समय की बात है। चीन में एक धनवान व्यक्ति रहता था। उसका व्यवसाय था, भेड़ पालन करना। एक बार उसने भेड़ों को चराने और उनकी देखभाल करने के लिए दो लड़के रख लिए और दोनों लड़कों को आधी आधी भेड़ें बाँट दी। कुछ समय तक तो सब ठीक चलता रहा परंतु धीरे-धीरे भेड़ें दुबली होती गई और उनमें से कुछ तो मर भी गई। उसने जाँच की कि यह सब कैसे और क्यों हुआ?

उसे ज्ञात हुआ कि दोनों लड़के भेड़ों की देखभाल करने के बजाय अपने-अपने व्यसनों में लगे हुए हैं। उनमें से एक लड़के को जुआ खेलने की आदत थी, उसे जब भी मौका मिलता, वह भेड़ों को छोड़कर जुआ खेलने के लिए जा बैठता था। भेड़ें कहीं से कहीं पहुँच जाती थी और भूखी प्यासी कष्ट पाती थी। यही बात दूसरे लड़के के साथ भी थी, वह पूजा पाठ करने का आदी था। वह पूजा पाठ करता था और भेड़ों पर ध्यान नहीं देता था।

दोनों लड़के कर्तव्य पालन की उपेक्षा करते हुए पकड़े गए। उन्हें न्यायाधीश के सामने प्रस्तुत किया गया। दोनों के कार्य और कारणों में अन्तर था, परंतु कर्तव्य पालन की उपेक्षा करने के लिए दोनों समान रूप से दोषी थे। न्यायाधीश ने दोनों को समान रूप से दंडित किया और कहा कि कर्तव्य की उपेक्षा करके, जो भी कुछ किया जाता है वह व्यसन ही है, व्यसन में चाहे जुआ खेला हो चाहे पूजा पाठ किया हो। कर्तव्य की अपेक्षा तो दोनों में ही है। इसलिए वे दोनों ही समान रूप से दंड के भागी हैं।

शिक्षा - इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है कि कर्तव्य भावना से बड़ा होता है। कर्तव्य की उपेक्षा करके दूसरा कोई भी कार्य किया जाए, चाहे वह कितना भी अच्छा क्यों न हो, व्यसन ही माना जाएगा।

Tuesday, 23 September 2025

(4.1.7) What is GEN Z or Generation Z जेन जेड या जेन जी किसे कहते हैं?

 What is GEN Z or Generation Z जेन जेड या जेन जी किसे कहते हैं?

नेपाल में हुए राजनीतिक उथल पुथल ने दुनिया भर का ध्यान अपनी ओर खींचा है। इस प्रदर्शन की विशेष बात यह थी कि इसका कोई व्यक्ति विशेष नेतृत्व नहीं कर रहा था। पूरे प्रदर्शन का नेतृत्व एक उम्र विशेष के युवा ही कर रहे थे। इस युवा वर्ग के लिए Gen Z शब्दावली का प्रयोग किया गया था। यह “Generation Z” का संक्षिप्त रूप है। जिसे संक्षेप में “GEN Z” या GEN ZEE (जेन जेड या जेन जी) बोला जाता है।

“GEN Z” कोई राजनीतिक सामाजिक या सांस्कृतिक संगठन नहीं है, बल्कि काल खण्ड विशेष में जन्में लोगों की एक पीढ़ी यानि एक Generation के सभी लोगों के लिए प्रयुक्त होने वाले शब्द हैं।

जेन जी” किसे कहा जाता है?

अब हम जानेंगे कि जेन जीकिसे कहा जाता है, तथा इसमें किस उम्र के लोग शामिल होते है?

जेनरेशन जेडया जनरेशन जीउन लोगों के समूह को कहा जाता है जो 1997 से 2012 के बीच में पैदा हुए हैं। इन लोगों को Zoomers के नाम से भी जाना जाता है।

Gen Z की सामान्य विशेषताएं -

यह वह युवा वर्ग है जो तकनीक, इंटरनेट और सोशल मीडिया के साथ बड़ा हुआ है। यह वह पहली पीढ़ी है जिन्हें जन्म के साथ ही इंटरनेट, स्मार्टफोन आदि की सुविधा मिली हैं।

ये अपनी अलग सोच और आदतों से समाज और अर्थव्यवस्था दोनों पर असर डाल रहे हैं।

इन्हें Digital Natives भी कहा जाता है क्योंकि इनका जीवन स्मार्टफोन, इंटरनेट और सोशल मीडिया से जुड़ा हुआ होता है। यही वजह है कि टेक्नोलॉजी का प्रयोग करना इनके लिए बहुत आसान है।

ये वित्तीय सोच वाले होते हैं।

अन्य पीढ़ियों की तुलना में इनमें अधिक विविधता होती है।

ये राजनीतिक और सांस्कृतिक रूप से प्रगतिशील होते हैं।

ये अपनी नौकरी से मिलने वाले उद्देश्य और संतुष्टि को महत्व देते हैं।

ये अपनी रुचि और रुझान के अनुसार ही नौकरी या व्यवसाय करना चाहते हैं।

ये किसी संगठन में काम करते समय ऐसे लाभों और सुविधाओं की तलाश में रहते हैं जो उन्हें मूल्यवान महसूस कराए।

ये अपनी रचनात्मकता और मल्टीटास्किंग कौशल के लिए जाने जाते हैं।

ये लोग टेक्नोलॉजी के माध्यम से पूरी दुनिया से जुड़े हुए होते हैं और ऑनलाइन माध्यमों से नए रुझान बनाते हैं और अपना कल्चर तैयार करते हैं।

ये लोग तकनीक प्रेमी और स्वाभाविक इंटरनेट उपयोगकर्ता होते हैं।

ये बदलाव के प्रति ज्यादा खुले और अपने विचारों में उदार होते हैं।

इनमें धैर्य की कमी होती है और ये शीघ्र क्रोधित हो जाते हैं।

ये परंपराओं और रीति रिवाजों में कम विश्वास रखते हैं।

इनमें से ज्यादातर का झुकाव पश्चिमी सभ्यता की ओर होता है।

ये एकल परिवार को प्राथमिकता देते हैं।

ये मोबाईल फोन का ज्यादा प्रयोग करते हैं।

इनमें से अधिकांश में सहिष्णुता की कमी होती है।

Friday, 12 September 2025

(6.11.19) रामचरितमानस किन लोगों के समझ में नहीं आती है? Who cannot understand Ramcharit Manas

रामचरितमानस किन लोगों के समझ में नहीं आती है? Who cannot understand Ramcharit Manas 

रामचरितमानस भारतीय संस्कृति में एक विशेष स्थान रखती है और मनुष्य की सबसे बड़ी मार्गदर्शक है। यह महान कवि गोस्वामी तुलसीदास जी के द्वारा रचित प्रसिद्ध महाकाव्य है। इसके नायक मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम हैं। इसकी भाषा सुगम है। फिर भी यह कुछ लोगों के समझ में नहीं आती है। इसके संबंध में तुलसीदास जी कहते हैं कि रामचरितमानस बोध गम्य है, परंतु यह तीन प्रकार के व्यक्तियों के समझ में नहीं आती है। इसे स्पष्ट करने के लिए रामचरितमानस में एक दोहा इस प्रकार है - 

जे श्रद्धा संबल रहित, नहिं संतन्ह कर साथ।

तिन्ह कहुँ मानस अगम अति, जिन्हहि न प्रिय रघुनाथ।

अर्थात जिनके मन में श्रद्धा का भाव नहीं है, संतों का साथ नहीं है और जिनको श्री राम से प्रेम नहीं है, उनके लिए यह रामचरितमानस अगम है। यानि श्रद्धा, सत्संग और राम के प्रति प्रेम के बिना इसको समझा नहीं जा सकता।

 

Wednesday, 3 September 2025

(6.6.9) वह विजय पाने का हकदार होता है Vijay Kaun Pataa Hai ? Krishna Ki Shiksha

 वह विजय पाने का हकदार होता है Vijay Kaun Pataa Hai ? Krishna Ki Shiksha

भगवान श्री कृष्णा अर्जुन से कहते हैं, हे पार्थ मनुष्य का यह कर्तव्य है कि वह अपना पतन न होने दे। और स्वयं ही अपना उद्धार करे। मनुष्य स्वयं ही अपना मित्र भी है और स्वयं ही अपना शत्रु भी। जिसने अपने अहम, अपने मन और अपनी इंद्रियों को अपने वश में कर लिया हो, वह स्वयं ही अपना मित्र है और जो इनके बस में हो गया, पार्थ, वह स्वयं ही अपना शत्रु है।

जो शीतकाल और ग्रीष्मकाल, सुख और दुख, मान और अपमान में शांत रहे और संतुलन बनाए रखें, वह जितेंद्रिय पुरुष स्वतः ही विजय पाने का हकदार हो जाता है।

Tuesday, 2 September 2025

(6.4.29) आर्थिक सम्पन्नता हेतु हनुमान चालीसा की चौपाई Hanuman Chalisa Chaupai for Prosperity /Ashta Siddhi Nau Nidhi Ke Data

आर्थिक सम्पन्नता हेतु हनुमान चालीसा की चौपाई Hanuman Chalisa Chaupai for Prosperity

ब्रह्मा आदि अनेक देवताओं का आशीर्वाद और वरदान पाने के कारण हनुमान जी  अत्यन्त शक्ति सम्पन्न हैं. यदि कोई व्यक्ति हनुमान जी के किसी भी मंत्र का पूर्ण निष्ठा और विश्वास के साथ जप करे, तो उस व्यक्ति को हनुमान जी की कृपा व आशीर्वाद से भौतिक और अध्यात्मिक लाभ मिलते हैं.

हनुमान जी के पास आठ सिद्धियाँ और नौ निधियाँ हैं. इन सिद्धियों और निधियों को दूसरे व्यक्ति को प्रदान करने की शक्ति माता जानकी के आशीर्वाद से हनुमान जी को प्राप्त हुई हैं. अतः जो व्यक्ति हनुमान चालीसा की इस चौपाई का निष्ठा और विश्वास के साथ पाठ करे तो उसे हनुमान जी की कृपा से आर्थिक सम्पन्नता प्राप्त होती है.

इस चौपाई का पाठ करने की विधि इस प्रकार है –

दैनिक कार्य से निवृत्त होकर प्रातःकाल उत्तर या पूर्व में मुहँ करके किसी शांत स्थान पर ऊन के आसन पर बैठ जाएँ. अपने सामने हनुमान जी का चित्र रख लें. अपनी आँखें बन्द करके हनुमान जी का ध्यान करें.

ध्यान इस प्रकार है –

अतुल बल के धाम, सोने के पर्वत सुमेरु के समान कान्तियुक्त शरीर वाले, दैत्यरूपी वन के के लिए अग्निरूप, ज्ञानियों में अग्रगण्य, सम्पूर्ण गुणों के निधान, वानरों के स्वामी, श्री रघुनाथ जी के प्रिय भक्त, पवन पुत्र श्री हनुमान जी को मैं प्रणाम करता हूँ.

इसके बाद निम्नांकित चौपाई का प्रतिदिन पाँच, सात या ग्यारह माला का निष्ठा व विश्वास के साथ तीन महीनें तक जप करें. जप जितना ज्यादा होगा, प्रतिफल उतना ही ज्यादा प्राप्त होगा. चौपाई इस प्रकार है –

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता, अस बर दीन जानकी माता.

दैनिक जप समाप्त हो जाने पर पूजा के स्थान को तुरंत नहीं छोड़े. मन्त्र जप के बाद शान्ति पूर्वक बैठ जाएँ, अपनी आँखें बंद करें व हनुमान जी के असीम स्नेह, शक्ति व आशीर्वाद का चिंतन करें और पूर्ण विश्वास के साथ भावना करें कि हनुमान जी की कृपा से आपको आर्थिक सम्पन्नता प्राप्त हो रही है, आपके व्यवसाय में उत्तरोत्तर वृद्धि हो रही है और आपकी मनो कामना पूर्ण हो रही है.

इसके बाद आप हाथ जोड़ कर हनुमान जी के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करें व उनके प्रति विश्वास की भावना के साथ जप के स्थान को छोड़ कर अपने दैनिक कार्य में लग जाएँ.     

Saturday, 30 August 2025

(2.2.9) सुकरात के सुविचार Socrates Quotes in Hindi सुकरात के अनमोल विचार Sukrat Ke Suvicha

सुकरात के सुविचार Socrates Quotes in Hindi सुकरात के अनमोल विचार Sukrat Ke Suvichar

सुकरात के सुविचार Socrates Quotes in Hindi सुकरात के अनमोल विचार Sukrat Ke Suvichar

सुकरात यूनान के महान दार्शनिक और विचारकों में से एक थे. उन्होंने यूनान के नवयुवकों को स्वतन्त्र भाव से जीने का सन्देश दिया था. उनके विचार इतने प्रभावशाली थे कि जो व्यक्ति एक बार सुन लेता था तो वह उनका अनुयायी बन जाता था. तो, आइये ऐसे महान दार्शनिक के सुविचारों को सुनें –

जो व्यक्ति कम से कम में संतुष्ट है, वही व्यक्ति सबसे अधिक धनवान है, क्योंकि संतुष्टि ही प्रकृति की सबसे बड़ी दौलत है.

दुनिया में सम्मान से जीने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि हम वैसे बन जायें जैसा हम होने का दिखावा करते हैं.

मित्रता भले ही सोच समझ कर और समय लगा कर करो, लेकिन जब एक बार मित्रता हो जाये तो उसे बहुत ही विश्वास और मजबूती के साथ निभाओ.

आत्मा अमर है, लेकिन जो व्यक्ति नेकी के मार्ग पर चलते हैं उनकी आत्मा अमर और दिव्य भी होती है.

हमारी प्रार्थना बस सामान्य रूप से आशीर्वाद पाने के लिए ही होनी चाहिए न कि कोई वस्तु, क्योंकि ईश्वर जानता है कि हमारे लिए क्या अच्छा है.

यदि सभी के दुर्भाग्य अलग अलग ढेर में रखे गए हो और जहाँ से सभी को बराबर हिस्सा लेना हो, तो अधिकांश लोग स्वयं के ढेर को ही लेना चाहेंगे. 

चाहे जो हो जाये, शादी अवश्य कीजिये. यदि अच्छी पत्नी मिली तो, आपकी जिन्दगी खुशहाल रहेगी; और यदि बुरी पत्नी मिली तो, आप दार्शनिक बन जायेंगे.

जो व्यक्ति अपने अवगुण और दूसरों के गुण देखता है, वही व्यक्ति महान बन सकता है.

झूठे शब्द सिर्फ खुद में ही बुरे नहीं होते, बल्कि वे आपकी आत्मा को भी बुराई से संक्रमित कर देते हैं.

ऐसा व्यवहार दूसरों के साथ कभी नहीं करें जैसा व्यवहार कोई दूसरा आपके साथ करे तो, आपको बुरा लगे.

इस दुनियाँ में केवल एक ही चीज अच्छी है, वह है ‘ज्ञान’ और केवल एक ही चीज बुरी है, वह है ‘अज्ञान’.

व्यक्ति की सबसे बड़ी ताकत है उसके विचार, आप जो सोचते हैं और जैसा सोचते हैं, आप वैसे ही बन जाते हैं.

महान व्यक्ति विचारों और जीवन मूल्यों पर चर्चा करते हैं, साधारण व्यक्ति घटनाओं पर चर्चा करते हैं, जबकि निम्न श्रेणी के व्यक्ति खाने – पीने की चीजों  और एक दूसरे की चुगली पर चर्चा करते हैं.

एक गलत विचार का समर्थन जारी रखने से अच्छा है, आप अपनी राय बदल लें.

ख़ुशी का रहस्य ज्यादा पाने में नहीं है, बल्कि थोड़े का आनंद लेने की क्षमता विकसित करने में है.

हम उस बच्चे को आसानी से क्षमा कर सकते हैं जो अँधेरे से डरता हो, लेकिन जीवन की वास्तविक त्रासदी तब है, जब आदमी प्रकाश से डरने लग जाये.

साहसी व्यक्ति वह है जो परिस्थितियों से डर कर भागता नहीं है, वह अपनी जगह दृढ रहता है और हर परिस्थिति का सामना करता है.

सबसे आसान और विनम्र  तरीका यह है कि आप दूसरों को कुचलें नहीं बल्कि खुद में सुधार करें.

व्यक्ति पैसे से अच्छे गुण नहीं खरीद सकता, परन्तु अच्छे गुणों की वजह से वह धनवान अवश्य बन सकता है.

किसी भी समस्या को ठीक से समझ लेने से, उसके समाधान तक पहुँचने का आधा रास्ता पूरा हो जाता है.

जो व्यक्ति अपने अज्ञान के बारे में जानता है, वह सबसे ज्यादा बुद्धिमान है.

बहस समाप्त होने के बाद, निंदा हारे हुए व्यक्ति का हथियार बन जाती है.

 

(2.3.8) ऊँची सोच Unchi Soch प्रेरणादायक कहानी An inspirational story

ऊँची सोच Unchi Soch प्रेरणादायक कहानी An inspirational story

ऊँची सोच Unchi Soch प्रेरणादायक कहानी An inspirational story 

एक बार एक धनवान व्यक्ति किसी पर्यटन स्थल पर अपनी मंहगी कार के पास खड़ा होकर प्राकृतिक दृश्यों को निहार रहा था. तभी उसका ध्यान एक फटे पुराने वस्त्र पहने हुए गरीब लड़के की तरफ गया जो उसकी (धनवान व्यक्ति) कार को ध्यान पूर्वक देख रहा था. उस लड़के के चहरे पर विशेष प्रकार के भाव आ रहे थे. धनवान व्यक्ति को ऐसा लगा कदाचित वह लड़का उसकी कार में बैठना चाहता है.

गरीब लड़के पर तरस खाकर धनवान व्यक्ति ने कहा, “क्या तुम इस कार में बैठना चाहते हो?“ लड़के के उत्तर की प्रतीक्षा किये बिना ही उसने कार का दरवाजा खोल दिया और लड़के को कार में बैठने का इशारा किया. लड़का भी कार में बैठने के लोभ का संवरण नहीं कर सका और वह कार में बैठ गया. थोड़ी देर तक कार में घुमाने के बाद उसने लड़के को खाने के लिए भी कुछ दिया.

कार से उतरते समय लड़के ने कहा, “ साहब, आपकी कार तो बहुत अच्छी है, यह तो बहुत ही मँहगी होगी.”

धनवान आदमी ने कहा, “हाँ बेटा, यह लाखों रुपये की है.”

लड़के ने जिज्ञासा वश पूछा, “ तब तो इसे खरीदने के लिए आपने बहुत मेहनत की होगी.”

धनवान व्यक्ति ने हँसते हुए कहा,” बच्चे, हर चीज मेहनत से नहीं मिलती. यह कार मेरे भाई ने मुझे उपहार में दी है.”

गरीब लड़के ने कुछ सोचते हुए कहा, “वाह ! आपके भाई कितने अच्छे हैं.”

धनवान आदमी ने कहा कि मुझे मालूम है कि तुम क्या सोच रहे हो ? तुम सोच रहे हो कि कितना अच्छा होता कि तुम्हारे भी कोई ऐसा भाई होता जो इतनी मंहगी कार तुम्हें उपहार के रूप में दे देता.

गरीब लड़के की आँखों में एक विशेष प्रकार की चमक थी. उसने कहा, “नहीं साहब, मैं कार उपहार में लेने की बात नहीं सोच रहा हूँ. मैं तो आपके भाई की तरह बनने की बात सोच रहा हूँ.”  

इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें हमेशा अपनी सोच ऊँची रखनी चाहिए, दूसरों की अपेक्षा से कहीं अधिक ऊँची.