Friday, 20 February 2026

(2.3.15) नेपोलियन बोनापार्ट और आल्प्स पर्वत Napoleon aur Alps Parvat / Napoleon crossed Alps Mountain

नेपोलियन बोनापार्ट और आल्प्स पर्वत Napoleon aur Alps Parvat / Napoleon crossed Alps Mountain

विश्व के इतिहास में नेपोलियन को महान सेनापतियों में से एक माना जाता है। वह किसी भी काम को असंभव नहीं मानता था। वह जीवन भर जोखिम भरे काम करता रहा। एक बार उसने आल्प्स पर्वत को पार करने का निश्चय किया और अपनी सेना के साथ पर्वत को पार करने के लिए चल पड़ा।

पहाड़ी मार्ग में उसे एक बूढी औरत मिली। उसने कहा, “नेपोलियन यह तुम कौन सा सपना देख कर आए हो? आज तक न जाने कितने शासक आल्प्स को पार करने के लिए तत्पर हुए, लेकिन हर कोई यहाँ से लौटकर गया है। वे एक पहाड़ी भी पार नहीं कर पाए। तुम्हारे पास तो इतना दलबल है। तुम इतनी पहाड़ियों को कैसे पार कर पाओगे? मेरा कहना मानो और यही से वापस चले जाओ।

नेपोलियन ने बूढ़ी औरत से कहा, “आपने यह कहकर मेरा उत्साह दुगना कर दिया है।

उसने आगे कहा, “नेपोलियन के सामने इस दुनिया का कोई भी आल्प्स ऐसा नहीं है, जिसे नेपोलियन चाहे और पार ना कर सके। मैं इसे अवश्य पार करूंगा। मेरे लिए असंभव जैसा कुछ नहीं है।

बूढी औरत ने नेपोलियन को ऊपर से नीचे तक ध्यान से देखा। उसकी आंखों की चमक तथा चेहरे पर आए हुए आत्मविश्वास को देख कर कहा,” नेपोलियन, मैं इन पहाड़ों की देवी हूँ और इनकी रक्षा करती हूँ। अब तक शासक तो बहुत आए पर जो आत्मविश्वास, जो मनोबल, जो सुदृढ़ मानसिकता मुझे तुम्हारे भीतर दिखाई दी, वह अब तक और किसी शासक के भीतर दिखाई नहीं दी। आओ, मैं तुम्हारा अभिनंदन करती हूँ और तुम्हारी मदद करती हूँ।

नेपोलियन बोनापार्ट ने आत्म विश्वास और दृढ़ मानसिकता के बल पर अपनी सेना के साथ आल्प्स पर्वत को सफलतापूर्वक पार किया।

शिक्षा - इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि यदि किसी कार्य को आत्मविश्वास, मनोबल और  दृढ़ मानसिकता के साथ शुरू किया जाए, तो उसमें सफलता अवश्य मिलती है।