Saturday, 18 April 2026

(9.3.2/1) श्रीमद्भागवत की रचना किसने की और क्यों की? Bhagwat Ki Rachna Kisne Kee? Kyon Kee ?

श्रीमद्भागवत की रचना किसने की और क्यों की? Bhagwat Ki Rachna Kisne Kee? Kyon Kee ?

पराशर ऋषि के पुत्र श्री वेदव्यास जी ने कलयुग को आया देखकर सर्व कल्याण की भावना से वेद को चार भागों में विभक्त कर दिया। इसके अतिरिक्त उन्होंने 17 पुराणों की रचना की और महाभारत भी लिख दिया। इतना सब करने पर भी उनके मन को शान्ति नहीं मिली। वे असंतोष और अशांति का अनुभव कर रहे थे।

एक दिन व्यास जी अशांति के विचारों में डूब कर बैठे हुए थे। संयोग से उसी समय नारद जी अपनी वीणा लिए हुए वहाँ आ गए। व्यास जी को विचार मग्न और उदास देखकर नारद जी ने उनके दुख का कारण पूछा। इस पर व्यास जी ने उत्तर दिया कि मैंने इतिहास, पुराण, महाभारत आदि ग्रंथों की रचना की है, परंतु मेरा चित्त सुखी नहीं है, मैं अभी भी असंतुष्टि का अनुभव कर रहा हूं। मुझे ऐसा लग रहा है जैसे मुझे कुछ और करना चाहिये। लेकिन क्या करना चाहिये? यह मैं समझ नहीं पा रहा हूँ। अब आप ही मुझे ऐसा कुछ बताइए जिससे मेरे मन को संतुष्टि मिल जाए।

नारद जी ने व्यास जी की बात को ध्यान से सुना और कहा कि आपने पुराणों तथा महाभारत में धर्म का निरूपण किया है, परंतु आपने भगवान श्री हरि की निर्मल भक्ति और प्रेम की कथाएं नहीं लिखी हैं। मनुष्य मात्र को सच्चा सुख भगवान की भक्ति के द्वारा ही प्राप्त हो सकता है। इसलिए अब आप दुखी लोगों के दुखों को दूर करने के लिए भगवान की सगुण लीलाओं का वर्णन करो। जिससे सब लोगों में भगवान की भक्ति उत्पन्न हो और उनका कल्याण हो।

इस संदर्भ में महर्षि वेदव्यास जी का मार्गदर्शन करने के लिए नारद जी ने उन्हें चार श्लोक बताएं। यही चार श्लोक चतु:श्लोकी भागवत के नाम से जाने जाते हैं। इन चार श्लोक का विस्तार करके ही वेदव्यास जी ने नारद जी की प्रेरणा से 18000 श्लोक वाले श्रीमद्भागवत महापुराण की रचना की।