श्री मद्भागवत पुराण से क्या शिक्षा मिलती है? Bhagwat Kya Sikhati hai? भागवत की शिक्षा
श्री मद्भागवत पुराण केवल एक धार्मिक ग्रंथ ही नहीं है, बल्कि यह एक पूर्ण अध्यात्मिक दर्शन है। जो यह बताता है कि
हम कौन हैं? हमारे दुखों का कारण क्या है? ईश्वर कौन है और
भक्ति क्या है?
यह समस्त प्राणियों के लिए सांसारिक जीवन जीते हुए ज्ञान
तथा मुक्ति का मार्ग दिखाता है।
यह सिखाता है कि शरीर नश्वर है और आत्मा शाश्वत है। भौतिक
दुनियाँ में सुख-दुख अस्थाई हैं। इसलिए आध्यात्मिक ज्ञान को प्रधानता देनी चाहिए।
श्रीमद् भागवत ईश्वर के प्रति निश्छल भक्ति, निस्वार्थ प्रेम और पूर्ण समर्पण की शिक्षा देता है। यह
ग्रंथ सिखाता है कि जीवन का सर्वोच्च उद्देश्य संसार में रहते हुए ईश्वर से जुड़ना, मन की शुद्धि, विकारों का त्याग और अंततः
भगवत प्राप्ति है।
श्रीमद् भागवत कथा से मिलने वाली कुछ और शिक्षा इस प्रकार
है -
(एक) भगवत प्राप्ति के लिए
ज्ञान और कर्म से ज्यादा भाव और प्रेम की आवश्यकता है।
(दो) यह मृत्यु के भय को दूर
करती है। यह सिखाती है कि यदि व्यक्ति भक्ति के मार्ग पर चले, तो उसे मृत्यु से
डरने की आवश्यकता नहीं होती है।
(तीन) हमेशा ही अच्छे कर्म करो, परिणाम क्या आएगा इसके बारे में सोच कर अपने मन की शांति को
भंग मत होने दो। ईश्वर को पता है कि आपके लिए सर्वश्रेष्ठ क्या है?
(चार) यदि व्यक्ति पूरे
विश्वास के साथ ईश्वर के प्रति समर्पित हो जाता है, तो ईश्वरीय शक्ति
कभी भी उसे निराश नहीं करती है।
(पाँच) अहंकार व्यक्ति को
विनाश की ओर ले जाता है और विनम्रता उत्थान की ओर। इसलिए अहंकार को त्याग कर
विनम्रता को धारण करना ही हितकारी है।
(छठा) अपने दैनिक क्रिया कलापों को सोच समझ कर करना चाहिए। स्मरण रखिए, व्यक्ति जो कुछ भी संसार को देता है, वही उसको वापस मिलता है।