अधिक मास का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व Religious and Spiritual Importance of Adhik
Maas
हिंदू पंचांग के अनुसार अधिक मास हर तीसरे साल
में आने वाला अतिरिक्त महीना है। इसका धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व इस प्रकार है -
अधिक मास भगवान विष्णु को समर्पित होने के कारण
विशेष फलदायी माना जाता है।
भगवान विष्णु ने ही इस महीने को पुरुषोत्तम मास
का नाम दिया है।
यह महीना आत्म शुद्धि, भक्ति और दान पुण्य के लिए अति उत्तम है।
इस महीने में किए गए जब जप, तप, दान, हवन आदि का फल तुलनात्मक रूप से 10 गुना अधिक
मिलता है।
इस महीने में सात्विक जीवन जीने की अपेक्षा की
जाती है। इसमें किए गए सात्विक आचरण और व्यवहार से व्यक्ति में आत्म उन्नति का भाव
जागृत होता है।
साधु संतों की सेवा करने और सत्संग में समय
बिताने को अधिक महत्व दिया जाता है। इससे समर्पण की भावना विकसित होती है।
इस महीने में किए गए धार्मिक कार्यों, दान, पुण्य आदि से
पापों का नाश होता है और व्यक्ति को मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त
होती है।
अधिक मास में आने वाली परमा एकादशी और पद्मिनी
एकादशी का व्रत रखने से सभी प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है।
यह महीना आध्यात्मिक विकास, सेवा भाव, आत्म चिंतन और ईश्वरीय आराधना - उपासना के लिए श्रेष्ठ समय है।
इस महीने में किए गए निस्वार्थ कार्य व्यक्ति के आध्यात्मिक पुण्य में वृद्धि करते हैं।
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