लीप ईयर और अधिक मास में क्या अंतर है Difference between Adhik Maas and Leap Year
लीप ईयर और अधिक मास के अंतर को जानने से पहले हम यह
जानेंगे की लीप ईयर किसे कहते हैं और अधिक मास किसे कहते हैं।
लीप ईयर किसे कहते हैं?
ग्रेगोरियन कैलेंडर सूर्य की गति पर आधारित होता है। इसके
अनुसार 1 वर्ष में 365 दिन और 6 घंटे होते हैं। इन अतिरिक्त 6 घंटे को हर चौथे
वर्ष जोड़कर एक पूरा दिन बना दिया जाता है जिससे वह वर्ष 365 दिन के बजाय 366 दिन
का हो जाता है। इसे ही लीप ईयर कहा जाता है। लीप ईयर में फरवरी 29 दिन की होती है।
अधिक मास किसे कहते हैं?
सनातन पंचांग के अनुसार काल गणना चंद्रमा और सूर्य दोनों की
गति के अनुसार की जाती है। चंद्रमा की गति के अनुसार एक चंद्र वर्ष 354 दिन का
होता है और सूर्य की गति के अनुसार एक सौर वर्ष 365 दिन का होता है। चंद्रवर्ष और
सौर वर्ष के बीच 11 दिन का अंतर आ जाता है। इन 11 दिनों को हर तीसरे वर्ष जोड़कर
एक अतिरिक्त महीना बना दिया जाता है। इस अतिरिक्त महीने को अधिक मास कहा जाता है।
लीप ईयर और अधिक मास में अंतर
पहला - लीप ईयर का संबंध ग्रेगोरियन कैलेंडर से है। जबकि
अधिक मास का संबंध सनातन पंचांग से है।
दूसरा - लीप ईयर हर चौथे साल आता है जबकि अधिक मास हर तीसरे
साल आता है।
तीसरा - लीप ईयर में एक वर्ष में केवल एक दिन की वृद्धि
होती है, जबकि अधिक मास में 1 वर्ष में एक माह की वृद्धि हो जाती है।
चौथा - लीप ईयर में बढ़ने वाला एक दिन केवल फरवरी के महीने
में ही बढ़ता है, जबकि अधिक मास के रूप में
बढ़ने वाला ऐसा कोई एक महीना निश्चित नहीं है।
पांचवां - लीप ईयर का कोई धार्मिक महत्व नहीं है जबकि अधिक मास का आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व है।
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