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Tuesday, 24 February 2026

(7.3.6) होलाष्टक क्या होते हैं /होलाष्टक में क्या करें क्या नहीं करें Holashtak Kya Hote Hain? Holashtak Me Kya Karen

 होलाष्टक क्या होते हैं होलाष्टक में क्या करें क्या नहीं करें Holashtak Kya Hote Hain? Holashtak Me Kya Karen
होलाष्टक क्या होते हैं ? होलाष्टक किसे कहते हैं

होली हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योंहार है.फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को होलिका दहन किया जाता है. पूर्णिमा से आठ दिन पूर्व यानि फाल्गुन शुक्ल पक्ष की अष्टमी से लेकर पूर्णिमा तक की आठ दिन की अवधि होलाष्टक कहलाती है यानि होलाष्टक अष्टमी तिथि को शुरू होते हैं और होलिका दहन के साथ ही समाप्त हो जाते हैं.

होलाष्टक को अशुभ काल या अशुद्ध कालांश माना जाता है. इसलिए इस अवधि में कोई भी शुभ कार्य नहीं किये जाते हैं.

होलाष्टक में वर्जित कार्य इस प्रकार हैं - 

किसी भी उद्देश्य के लिए भवन का निर्माण करना.

गृह प्रवेश करना.       

सगाई अथवा विवाह करना.

वाहन क्रय करना.

कुआ, जलाशय आदि खुदवाना,

मुंडन संस्कार करना.

किसी भी व्रत का आरम्भ और उद्यापन करना.

नव विवाहिता वधु का प्रवेश.

देव प्रतिमा की स्थापना करना.

यज्ञोपवीत संस्कार.

मन्त्र दीक्षा लेना.

कर्ण वेध.

आदि कार्य नहीं करने चाहिए.

लेकिन जो कार्य पहले शुरू किये जा चुके हैं, उन कार्यों को जारी रखा जा सकता है. नित्य एवं नैमित्तिक कर्म किये जा सकते हैं. इनके अतिरिक्त सूतिका स्नान आदि कार्य जिनकी अवधि निश्चित होती है वे कार्य किये जा सकते हैं.  

 

(7.2.6) मुण्डन संस्कार / चौलकर्म संस्कार का मुहूर्त Mundan Sanskar Muhurta, Chaulkarm Sanskar, Chuda Karm Sanskar

 मुण्डन संस्कार / चौलकर्म संस्कार का मुहूर्त Mundan Sanskar Muhurta, Chaulkarm Sanskar, Chuda Karm Sanskar

चौल कर्म संस्कार या चूड़ा कर्म संस्कार जिसे मुंडन संस्कार भी कहा जाता है, 16 संस्कारों में से एक प्रमुख संस्कार है। बालक के जन्म के पहले, तीसरे, पांचवें या सातवें इत्यादि विषम वर्षों में उत्तरायण के सूर्य में जातक का मुण्डन संस्कार किया जाता है।

इस मुहूर्त के लिए ग्राह्य मास इस प्रकार हैं -

वैशाख, ज्येष्ठ (लेकिन प्रथम गर्भ से ज्येष्ठ में जन्मे बालक का ज्येष्ठ के महिने में मुंडन निषेध है), आषाढ़ (शुक्ल पक्ष एकादशी से पूर्व), माघ तथा फाल्गुन।

इस मुहूर्त के लिए ग्राह्य तिथियाँ इस प्रकार हैं  -

दोनों पक्षों की द्वितीया, तृतीया,पंचमी,  सप्तमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी और त्रयोदशी तथा कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथियां ग्राह्य हैं।

मुंडन के मुहूर्त के लिए ग्राह्य वार हैं - सोमवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार।

इन वारों के अतिरिक्त ब्राह्मणों के लिए रविवार, क्षत्रियों के लिए मंगलवार तथा वैश्यों के लिए शनिवार भी शुभ माने गए हैं।

इस मुहूर्त के लिए ग्राह्य नक्षत्र हैं - अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, चित्रा, स्वाती, ज्येष्ठा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा और रेवती।