Saturday, 11 May 2019

(7.4.1) Vastu tips in general


Vastu Tips in General / घर में कहाँ क्या होना चाहिए 



वायव्य कोण – स्टोर, अथिति कक्ष, कन्या का कक्ष, शौचालय , सेप्टिक टेंक, जल प्रवाह, रसोईघर ( विकल्प के रूप में)
उत्तर – पूजा, पानी , कुआ, अध्ययन कक्ष, मुख्य द्वार, बरामदा, बगीचा, भंडार , सीढियां , जल प्रवाह, तहखाना , धन संग्रह, देव स्थान, नीची भूमि, नीचा मकान,  
ईशान कोण  – पूजा, पानी , कुआ, अध्ययन कक्ष, जल प्रवाह, बगीचा, नीची भूमि, नीचा मकान, 
पूर्व - पानी , कुआ, अध्ययन कक्ष , ऑफिस, मुख्य द्वार, स्नान गृह, जल प्रवाह, बरामदा, तहखाना, बगीचा, नीची भूमि,
अग्नि कोण – रसोईघर, बिजली के उपकरण
दक्षिण – स्टोर, सीढी, भारी सामान, मालिक कक्ष, शयन कक्ष, 
नैरत्य कोण  – स्टोर, सीढी, भारी सामान, मालिक कक्ष, शौचालय  
पश्चिम – स्टोर, भोजन कक्ष, बच्चों का कमरा, सीढियां, शौचालय, शेप्टिक टैंक

Friday, 10 May 2019

(6.2.1) Twelve Names of Lord Ganesh for fulfilling Desires


Twelve Names of Lord Ganesh for fulfilling desires गणेश जी के बारह नाम (विघ्न – बाधा दूर करने, विद्या प्राप्ति और कामना पूर्ति हेतु)

निम्नांकित श्लोक का विश्वास तथा निष्ठां के साथ प्रतिदिन एक बार पाठ करो और विश्वास करो कि गणेश जी का आशीर्वाद आपको मिल रहा है और आपकी मनो कामना कि पूर्ति हो रही है. 
सुमुखश्च-एकदंतश्च कपिलो गज कर्णक:
लम्बोदरश्च विकटो विघ्ननाशो विनायक:   
धूम्रकेतुर्गणाध्यक्षो भालचन्द्रो गजानन:
द्वादशैतानि नामानि य:  पठेच्छृ णुयादपि।            
विद्यारम्भे विवाहे च प्रवेशे निर्गमे तथा। 
संग्रामें संकटे चैव विघ्नस्तस्य न जायते।
अर्थ - जो व्यक्ति श्रद्धा और विश्वास के साथ, विद्यारंभ के समय, विवाह के समय, नगर में अथवा नव निर्मित भवन में प्रवेश करते समय, यात्रा में कहीं बाहर जाते समय, संग्राम के समय, किसी विपत्ति के समय, किसी कार्य को शुरू करते समय, किसी अधिकारी से मिलते समय या अन्य किसी भी शुभ कार्य करते समय यदि श्री गणेश जी के इन बारह नामों का स्मरण करता है तो उसके मार्ग में बाधा नहीं आती है और उसके उद्देश्य की प्राप्ति होती है.
नोट – उपर्युक्त श्लोक का प्रतिदिन एक बार पाठ करो तथा नीचे लिखे बारह नामो का ग्यारह बार पाठ करो और विश्वास करो कि गणेश जी का आशीर्वाद आपको मिल रहा है और आपकी मनो कामना कि पूर्ति हो रही है. 
जो उपर्युक्त श्लोक का पाठ नहीं कर सकें वे गणेश जी के निम्नांकित बारह नामों का ग्यारह बार पाठ करें -
गणेश जी के बारह नाम (विघ्न – बाधा दूर करने, विद्या प्राप्ति और कामना पूर्ति के लिए)
(१) ॐ सुमुखाय नमः (२) एकदन्ताय नमः (३) कपिलाय नमः (४) गजकर्णकाय नमः (५) लम्बोदराय नमः (६) विकटाय नमः (७) विघ्ननाशाय नमः (८ ) विनायकाय नमः  (९) धूम्रकेतवे  नमः (१०) गणाध्यक्षाय नमः  (११) भालचन्द्राय नमः (१२) गजाननाय नमः 
गणेश जी के चित्र को अपने सामने रख कर जो व्यक्ति श्रद्धा और विश्वास के साथ प्रति दिन भगवान् गणेश जी के इन बारह नामों का ग्यारह बार पाठ करता है –
उसकी कामना पूर्ति होती है, स्मरण शक्ति तीव्र होती है, कल्पना शक्ति बढती है, उसके किसी कार्य में रुकावट नहीं आती है, परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त होते हैं, उद्देश्य की पूर्ति होती है , कार्य में सफलता मिलती है. 

Saturday, 27 April 2019

(3.2.4) Durga Mantra (For fulfilling worldly desires )


Durga Mantra for fulfilling worldly desires दुर्गा प्रार्थना मंत्र (सांसारिक मनोकामना की पूर्ति हेतु )


देवी दुर्गा, हिन्दू धर्म के अनुसार बहुत लोक प्रिय देवी है।जो दिव्य माता के रूप में जानी जाती है। वह करुणा ,शक्ति ,नैतिकता ,बुद्धिमानी और संरक्षण का प्रतीक मानी जाती है।देवी दुर्गा को लक्ष्मी,सरस्वती और काली का मिश्रित रूप माना जाता है जिसके कारण इन तीनों देवियों की शक्तियां देवी दुर्गा में सम्मिलित हैं।वह अपने भक्तों  की मनोकामना पूर्ण करने में सक्षम है।
यदि कोई व्यक्ति निम्नांकित प्रार्थना मन्त्रों का पूरी निष्ठा और विश्वास के साथ जप(उच्चारण ) करता है तो देवी दुर्गा की कृपा से उसकी  मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
प्रार्थना मंत्र निम्नानुसार है:-
या देवी सर्व भूतेषु माँ  रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यैनमस्तस्यै ,नमस्तस्यै नमो नमः। 
या देवी सर्व भूतेषु शक्ति  रूपेण संस्थिता।नमस्तस्यैनमस्तस्यै ,नमस्तस्यै नमो नमः। 
या देवी सर्व भूतेषु बुद्धि  रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यैनमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नमः। 
या देवी सर्व भूतेषु लक्ष्मी  रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यैनमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नमः। 
या देवी सर्व भूतेषु शांति  रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यैनमस्तस्यै ,नमस्तस्यै नमो नमः। 
या देवी सर्व भूतेषु श्रद्धा  रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यैनमस्तस्यै ,नमस्तस्यै नमो नमः। 
या देवी सर्व भूतेषु कांति रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यैनमस्तस्यै ,नमस्तस्यै नमो नमः। 
या देवी सर्व भूतेषु वृत्ति रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यैनमस्तस्यै ,नमस्तस्यै नमो नमः। 
या देवी सर्व भूतेषु स्मृति रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यैनमस्तस्यै ,नमस्तस्यै नमो नमः। 
या देवी सर्व भूतेषु दया   रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यैनमस्तस्यै ,नमस्तस्यै नमो नमः। 
या देवी सर्व भूतेषु तुष्टि  रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यैनमस्तस्यै ,नमस्तस्यै नमो नमः। 
अर्थ :- देवी जो सम्पूर्ण प्राणियों में माँ ,शक्ति ,बुद्धि ,लक्ष्मी ,शांति ,श्रद्धा ,कांति ,वृत्ति ,स्मृति ,दया ,और तुष्टि के रूप में स्थित है, उस देवी को मैं बारम्बार प्रणाम करता हूँ।
इन प्रार्थना मंत्रो के बाद आप देवी के असीम स्नेह पर अपना ध्यान केन्द्रित करें।मन में भावना करें कि देवी दुर्गा ने आपकी प्रार्थना को सुन लिया है और आप पर देवी कृपा की वर्षा हो रही है।आप उसकी कृपा से प्रार्थना मंत्रों में वर्णित वस्तुओँ को प्राप्त कर रहें हैं।
देवी में जितनी श्रृद्धा  और विश्वास  होगा उतना ही अधिक फल मिलेगा। 

Thursday, 11 April 2019

(7.1.12) Panchak (Panchak Nakshtra)

Panchak / Panchak Nakshatra / Panchak nakshatron men kya kare kya nahin karen
पंचक / पंचक नक्षत्र / पंचकों में क्या करें क्या नहीं करें ?


पंचक / पंचक नक्षत्र / पंचक में क्या करें क्या नहीं करें ?
पंचक क्या हैं?
पांच पंचकों के समूह को पंचक कहा जाता है | ये पाँच नक्षत्र हैं – धनिष्ठा (के अंतिम दो चरण),शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद तथा रेवती |
पंचकों के बारे में भ्रान्ति क्या है ?
पंचकों के बारे में लोगों में भ्रान्ति है | कुछ लोग इस भ्रम में हैं कि पंचक शुभ कार्यों में वर्जित हैं | अतः पंचक नक्षत्रों में किसी शुभ कार्य की शुरूआत नहीं करनी चाहिये | जबकि वास्तविकता यह नहीं है | कई शुभ कार्य ऐसे हैं जो पंचकों में किये जाते हैं |
पंचकों में केवल निम्नांकित पाँच कार्य वर्जित हैं –
(1)काष्ठ एकत्रित (संग्रह) करना (2) खाट बुनना (3) मकान  पर छत डालना (4) दक्षिण दिशा की यात्रा करना (5) मृत व्यक्ति का दाह संस्कार करना |
लेकिन शवदाह करना अपरिहार्य (आवश्यक) हो जाता है अतः पंचकों में शवदाह करने की स्थिति में शव के साथ आटे की पाँच पुत्तिलिका बना कर उनका भी मृत व्यक्ति के साथ डाह संस्कार करना चाहिये |
इन पाँच कार्यों के अतिरिक्त अन्य कोई भी कार्य पंचकों में वर्जित नहीं माना जाता है |
विवाह, मुंडन, गृहारंभ, गृह प्रवेश, वधु प्रवेश, उपनयन सस्कार, रक्षाबंधन, भाई दूज आदि पर्वों तथा मुहूर्तों में पंचक नक्षत्रों को ग्राह्य माना जाता है |
कौनसे कार्य या मुहूर्त में कौनसा नक्षत्र लिया जाता है ?
विवाह में – धनिष्ठा, शतभिषा, उत्तराभाद्रपद  
सूतिका स्नान में – उत्तराभाद्रपद, रेवती
मुंडन संस्कार में – धनिष्ठा, शतभिषा तथा रेवती
शिक्षा प्रारंभ करने में – धनिष्ठा, शतभिषा, रेवती, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद
भवन निर्माण में – धनिष्ठा, शतभिषा, उत्तराभाद्रपद, रेवती
गृह प्रवेश में – उत्तराभाद्रपद, रेवती
कन्या वरण मुहूर्त (सगाई) में – धनिष्ठा, पूर्वाभाद्रपद
वर वरण मुहूर्त में – पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद
वाहन खरीदने में - धनिष्ठा , शतभिषा , रेवती 
हल चलाने में - उत्तराभाद्रपद , धनिष्ठा , शतभिषा , रेवती - 
इनके अतिरिक्त नक्षत्र तथा वार के मेल से कई शुभ योग, अमृत सिद्धि योग तथा सर्वार्थ सिद्धि बनते हैं जिनमें शुभ कार्य किये जाते हैं |

Sunday, 26 August 2018

(2.2.7) Success Quotes / Safalata Quotes

Safalata Quotes / Success Quotes 

1. मुझे सफलता के उपाय तो नहीं मालूम हैं , लेकिन यह मालूम है कि सबको खुश करने का प्रयास विफलता का उपाय है। (बिल कोस्बी )
2. कड़ी मेहनत के बिना सफलता की अपेक्षा करना ऐसा है, जैसे आप वहां से फसल काटने की कोशिश कर रहे हो, जहाँ फसल बोई ही नहीं है। (डेविड ब्लाए )
3. समस्त सफलताएं कर्म की नींव पर ही आधारित होती हैं।  (एंथनी रॉबिन्स )
4. विचारों को मूर्त रूप देने की क्षमता ही सफलता का रहस्य है। (हेनरी वार्ड बीचर )
5. कार्य समस्त सफलता की आधारभूत नीँव  है। ( पिकासो )
6. यदि  आप किसी चीज का सपना देखने का साहस कर सकते हैं, तो आप उसे प्राप्त भी कर सकते हैं।  (विनोबा भावे)
7. आप जितनी बार गिरते हैं, उससे अगर एक अधिक बार उठ खड़े हों, तो आप सफल हो जायेंगे। (चीनी कहावत) 

Friday, 6 April 2018

(3.2.3) Geeta ke atharah naam/ 18 names of Geeta


Bhagvad Geeta ke 18 naam / Eighteen names of Geeta / Importance of chanting 18 names of Geeta 

भगवद्गीता के अठारह नाम -
गीता गंगा च गायत्री सीता सत्या सरस्वती I
ब्रह्मविद्या ब्रह्मवल्ली त्रिसंध्या मुक्तगेहिनी I
अर्धमात्रा चिदानन्दा  भवघ्नी भयनाशिनी I
वेदत्रयी परा अनन्ता तत्वार्थज्ञानमंजरी.I

फलश्रुति- जो व्यक्ति भगवद्गीता के इन अठारह नामों का
नित्य स्मरण करता है, उसे मानसिक शान्ति मिलती है, मन निर्मल होता है तथा वह परम पद को प्राप्त करता है I 

Saturday, 6 May 2017

(8.1.27) Buddha Poornima / Peepal Purnima / Buddh Jayanti

Peepal Purnima / Buddha Jayanti /Buddha Poornima पीपल पूर्णिमा / बुद्ध पूर्णिमा / बुद्ध जयंती 

When is Buddha Poornima / When is Peepal Purnima पीपल पूर्णिमा कब है / बुद्ध  पूर्णिमा कब है 
वैसाख शुक्ल पूर्णिमा को पीपल पूर्णिमा या बुद्ध पूर्णिमा या बुद्ध जयंती कहा जाता है। 
Important things about Buddha Purnima /बुद्ध पूर्णिमा के बारे में मुख्य बातें :- 
(१) बुद्ध पूर्णिमा या बुद्ध जयंती को प्रति वर्ष  वैसाख शुक्ल पूर्णिमा को मनाया जाता है।
(२) इसी दिन भगवान बुद्ध का जन्म हुआ था।  इसी तिथि को बोध  गया में भगवान बुद्ध को दिव्य ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। यही तिथि उनका निर्वाण दिवस भी है। इसलिये बुद्ध धर्म के अनुयायी इस दिन को बहुत पवित्र मानते हैं। वे विहारों में पूजा करते हैं और भिक्षुओं को दान देते हैं।   
(३ ) हिन्दू वैसाखी पूर्णिमा को पवित्र तिथि के रूप में मानते हैं।लोग इस दिन व्रत रखते हैं। यदि इस दिन एक समय भोजन करके सत्यनारायण का व्रत करे तो सब प्रकार के सुख ,सम्पदा और श्रेय की प्राप्ति होती है। 
(४ ) इस दिन किये गये दान का विशेष महत्त्व है।
(५ ) बुद्ध पूर्णिमा को पीपल पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। उत्तर भारत के कुछ भागों में और विशेष रूप से  राजस्थान में इसे विवाह का अबूझ मुहूर्त माना जाता है। यदि उपयुक्त मुहूर्त नहीं मिले तो इस तिथि को विवाह आयोजित किया जाता है।
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Wednesday, 3 May 2017

(8.1.26) Ganga Dashami / Ganga Dashahara

Ganga Dashami / Ganga Dashehara गंगा दशमी / गंगा दशहरा 

When is Ganga Dashami / When is Ganga Dushehara गंगा दशमी कब है 
ज्येष्ठ शुक्ल दशमी  को गंगा दशमी कहा जाता है।  इसी दिन को गंगा दशहरा भी कहा जाता है।
Important things about Ganga Dashmi गंगा दशमी के बारे में महत्वपूर्ण बातें 
- जेष्ठ शुक्ल दशमी को हस्त नक्षत्र में स्वर्ग से गंगा का अवतरण हुआ था।
- इस दिन गंगा नदी में स्नान करना बहुत फलदायी माना जाता है। यदि गंगा नदी में स्नान करना संभव नहीं हो तो समीप के किसी जलाशय , नदी या घर के शुद्ध जल से स्नान करें।
- अन्न , वस्त्रादि का दान , जप - तप -उपासना और उपवास किया जाये तो दस प्रकार के पाप ( तीन प्रकार के कायिक , चार प्रकार के वाचिक , और तीन प्रकार के मानसिक पाप ) दूर होते हैं।
- गंगा नदी में स्नान करना संभव नहीं हो तो   समीप के किसी नदी या तालाब , जलाशय या घर के शुद्ध पानी से स्नान करें। स्नान करते समय  यह भावना करें कि मानो आप गंगा नदी में ही  स्नान कर रहें हैं। फिर शांत स्थान पर बैठकर निम्नांकित मंत्र से आव्हान आदि षोडशो पचार पूजन करें-
" ॐ नमः शिवायै नारायण्यै दशहरायै गंगायै नमः।"
दान - 
यदि व्यक्ति पूजन के बाद दान करना चाहे तो वस्तुओं की संख्या दस होनी चाहिए जैसे - दस दीपक , दस सेर तिल , दस फल आदि। इनको दान करते समय निम्नांकित मंत्र का जप करते हुए करें -
' गंगायै नमः'। 
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Monday, 1 May 2017

(8.1.25) Janaki Navami / Sita Navami

Sita Navami / Janaki Navami / सीता नवमी / जानकी नवमी 

When is Janaki Navami or Sita Navami जानकी नवमी या सीता नवमी कब है 
वैसाख शुक्ल नवमी को सीता  नवमी या जानकी नवमी कहा जाता है।  इस दिन भगवती जानकी का प्रादुर्भाव हुआ था। 
Important things about Seeta Navami or Janaki Navami सीता नवमी या जानकी नवमी के बारे में महत्वपूर्ण बातें 
- जानकी नवमी जिसे सीता नवमी के नाम से भी जाना जाता है, को देवी सीता के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है।  सीता को जानकी भी कहा जाता है।
- सीता को देवी लक्ष्मी का अवतार माना जाता है। 
- देवी सीता का जीवन महिलाओं के लिए आदर्श और अनुकरणीय माना जाता है। 
- इसलिए विवाहित महिलाएं इस दिन व्रत रखती हैं तथा देवी सीता से आशीर्वाद मांगती हैं। 
- पुरुष और महिलाएं रामायण का पाठ करते हैं। 
- उत्तर भारत के कुछ भागों में और विशेष रूप से राजस्थान में जानकी नवमी को विवाह के अबूझ मुहूर्त के रूप में माना जाता है। अत: विवाह का उपयुक्त मुहूर्त नहीं हो तो वैसाख शुक्ल नवमी को  विवाह संस्कार सम्पन्न किया जाता है।  
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Sunday, 30 April 2017

(3.1.35) Parashuram Gayatri Mantra

परशुराम गायत्री मंत्र / Parashuram Gayatri Mantra  in Hindi / Benefits of Parashuraam Gayatri Mantra 

परशुराम गायत्री मन्त्र तथा परशुराम गायत्री मन्त्र जप के लाभ 
परशुराम जी भगवान् विष्णु के छठे अवतार हैं। उन्हें आवेशावतार भी कहा जाता है। वे शस्त्र और शास्त्र के ज्ञाता हैं। वे तप, संयम, शक्ति, पराक्रम, ज्ञान, संस्कार, कर्तव्य और परोपकार के प्रतीक हैं। परशुराम गायत्री मन्त्र  के जप करने के लाभ इस प्रकार हैं -
- साधक को इच्छित फल प्राप्त होता है और उसकी मनोकामना पूर्ण होती है।
- आत्मबल बढ़ता है।
- कार्य में सफलता मिलती है।
- विद्या प्राप्ति होती है।
- तनाव से मुक्ति मिलती है।
- वाक् सिद्धि प्राप्त होती है। 
परशुराम गायत्री मन्त्र इस प्रकार है -
"ॐ जामदग्न्याय विद्महे महावीराय धीमहि तन्नो परशुरामः प्रचोदयात् ।" 
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