Saturday, 29 February 2020

(3.1.37) Batuk Bairava Mantra

Batuk Bhairava Mantra  (For removing calamity) बटुक भैरव मन्त्र  - ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय  कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं



बटुक भैरव मन्त्र  - ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय  कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं।
भैरव को भगवान् शिव का अंशावतार माना जाता है।  बटुक भैरव को भैरव का सौम्य और सात्विक रूप माना जाता है।  बटुक भैरव की पूजा - उपासना  आराधना से विपत्तियों का नाश होता है , आपदाएं दूर होती हैं  और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
इनकी आराधना - उपासना भैरव जयन्ती, अष्टमी, रविवार या मंगलवार से शुरू करनी चाहिये।
बटुक भैरव मन्त्र  की जप विधि इस प्रकार है -
उत्तर या पूर्व की तरफ मुँह  करके किसी शांत स्थान पर ऊन के आसान पर बैठें।  अपनी आँखें बंद करके बटुक भैरव का सात्विक ध्यान करें।  सात्विक ध्यान इस प्रकार है -
भगवान् श्री बटुक भैरव बालरूप में  हैं।  उनकी देहकान्ति  स्पटिक की तरह है।  घुंघराले केशों से उनका चेहरा प्रदीप्त है।  उनकी कमर और चरणों में नव मणियों के अलंकार ; जैसे किंकिणी, नुपुर आदि विभूषित हैं।  वे उज्जवल रूप वाले, भव्य मुख वाले, प्रसन्नचित्त और त्रिनैत्र युक्त हैं।  कमल के समान सुन्दर दोनों हाथों में वे शूल और दण्ड धारण किये हुए हैं। ऐसे भगवान् बटुक भैरव को मैं बारम्बार प्रणाम करता हूँ।  
ध्यान के बाद बटुक भैरव मन्त्र  का कम से काम 108 बार जाप करें। ऐसा इकतालीस दिन तक करें।  इस अवधि में शारीरिक व मानसिक रूप से शुद्धता तथा सात्विकता रखें।  बटुक भैरव मंत्र इस प्रकार है -
ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय  कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं।
मन्त्र जप के बाद भावना करें कि बटुक भैरव ने आपकी प्रार्थना को  सुन लिया है और उनकी कृपा से आपकी विपदा दूर हो जायेगी तथा आपके जीवन में प्रसन्नता व सम्पन्नता आयेगी।  



Sunday, 23 February 2020

(6.5.1) Om Namo Bhagawate Vasudevaay

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय Om Namo Bhagawate Vasudevaay 


"ॐ नमो भगवते वासुदेवाय " एक महामन्त्र  है। इस मन्त्र को द्वादशाक्षर मन्त्र भी कहा जाता है।  यह भगवान् विष्णु और भगवान् कृष्ण का मन्त्र है। यह सर्व कल्याणकारी मन्त्र है।  इस मन्त्र का जप करने से -
- बाधाओं से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख समृद्धि आती है।
- शारीरिक और मानसिक ऊर्जा प्राप्त होती है।
- मानसिक शान्ति मिलती है।
- आध्यात्मिक शक्ति मिलती है  जिससे इच्छा शक्ति प्रबल होती है।
- वासुदेव भगवान् के भक्तों का कभी भी अमंगल नहीं होता है।     

Thursday, 20 February 2020

(6.2.3) Rin Harta Ganesh Stotra (Rin Mukti Hetu Stotra)

Rin Harta Ganesh Stotra (Debt removing Ganesh Stotra) ऋण हर्ता  गणेश स्तोत्र (कर्ज मुक्ति हेतु प्रभावी उपाय)

व्यक्ति के जीवन में कभी - कभी ऐसा समय आता है जब उस पर ऋण या कर्ज बहुत अधिक बढ़ जाता है और उस कर्ज को चुकाने  का कोई मार्ग दिखाई नहीं देता है , तो इस स्थिति में ऋण या कर्ज मुक्ति से पाने के लिये ऋण हर्ता गणेश स्तोत्र का विश्वास  और निष्ठां पूर्वक पाठ करना उत्तम माना जाता है।  इस स्तोत्र का इकतालीस दिन तक  पाठ करने से गणेश जी की कृपा प्राप्त होती है तथा आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होने का कोई न कोई मार्ग दिखने लगता है।
ऋण हर्ता गणेश स्तोत्र की जप विधि इस प्रकार है -
प्रातःकाल दैनिक कार्य से निवृत्त होकर उत्तर या पूर्व की तरफ मुँह करके ऊनी आसन पर बैठ जाएँ।  भगवान् गणेश जी के चित्र को अपने सामने रख लें।  दीपक या धूपबत्ती जला लें।  अपनी आँखें बन्द करके भगवान् गणेश जी का ध्यान करें।  ध्यान इस प्रकार है -
सच्चिदानन्दमय भगवान् गणेश की अंगकान्ति  सिन्दूर के समान है।  उनके दो भुजाएं हैं।  वे लम्बोदर हैं और कमलदल पर विराजमान हैं।  ब्रह्मा आदि देव उनकी सेवा में लगे हैं तथा वे सिद्ध समुदाय से युक्त हैं।  ऐसे श्री गणपति देव को मैं प्रणाम करता हूँ।
इस प्रकार ध्यान करने के पश्चात ऋण हर्ता गणेश स्तोत्र का पाठ करें।  इस स्तोत्र का हिन्दी  रूपान्तरण इस प्रकार है -
"सृष्टि के आदिकाल में ब्रह्माजी ने सृष्टि रूप फल की सिद्धि के लिये जिनका सम्यक पूजन किया था, वे पार्वती  पुत्र गणेश सदा ही मेरे ऋण का नाश करें।
महिषासुर के वध के लिए देवी दुर्गा ने जिन गणनाथ की उत्कृष्ट पूजा की थी, वे पार्वती  पुत्र गणेश सदा ही मेरे ऋण का नाश करें।
कुमार कार्तिकेय ने तारकासुर के वध से पूर्व जिनका भली भाँति पूजन किया था, वे पार्वती  पुत्र गणेश सदा ही मेरे ऋण का नाश करें।
भगवान् सूर्यदेव ने अपनी तेजमयी प्रभा की रक्षा करने के लिये जिनकी आराधना की थी,  वे पार्वती  पुत्र गणेश सदा ही मेरे ऋण का नाश करें।
चन्द्रमाँ ने अपनी कान्ति की सिद्धि के लिए जिन गणनायक का पूजन किया था,  वे पार्वती  पुत्र गणेश सदा ही मेरे ऋण का नाश करें।
विश्वामित्र ने अपनी रक्षा के लिये तपस्या  द्वारा जिनकी पूजा की थी,  वे पार्वती  पुत्र गणेश सदा ही मेरे ऋण का नाश करें।"
इस स्तोत्र के पठन के बाद ऋणहर्ता महामन्त्र का भी एक सौ आठ बार जप करें। मन्त्र इस प्रकार है -
ॐ गणेश ऋणं छिन्धि वरेण्यं हुं नमः QV~
स्तोत्र तथा मन्त्र जप के बाद मन ही मन भावना करें कि भगवान् गणेश जी की कृपा से आपको ऋण (कर्ज) से मुक्ति मिलेगी और आपकी आर्थिक स्थिति अच्छी होगी।





Wednesday, 12 February 2020

(6.12.1) Batuk Bhairava Mantra

Batuk Bhairava Mantra - Om Hreem Batukaay Aapaduddhaaranaay Kuru kuru Batukaay Hreem
बटुक भैरव मन्त्र  - ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय  कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं।
(आपदा तथा विपत्ति निवारण हेतु )

भैरव को भगवान् शिव का अंशावतार माना जाता है।  बटुक भैरव को भैरव का सौम्य और सात्विक रूप माना जाता है।  बटुक भैरव की पूजा - उपासना  आराधना से विपत्तियों का नाश होता है , आपदाएं दूर होती हैं  और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
इनकी आराधना - उपासना भैरव जयन्ती, अष्टमी, रविवार या मंगलवार से शुरू करनी चाहिये।
बटुक भैरव मन्त्र  की जप विधि इस प्रकार है -
उत्तर या पूर्व की तरफ मुँह  करके किसी शांत स्थान पर ऊन के आसान पर बैठें।  अपनी आँखें बंद करके बटुक भैरव का सात्विक ध्यान करें।  सात्विक ध्यान इस प्रकार है -
भगवान् श्री बटुक भैरव बालरूप में  हैं।  उनकी देहकान्ति  स्पटिक की तरह है।  घुंघराले केशों से उनका चेहरा प्रदीप्त है।  उनकी कमर और चरणों में नव मणियों के अलंकार ; जैसे किंकिणी, नुपुर आदि विभूषित हैं।  वे उज्जवल रूप वाले, भव्य मुख वाले, प्रसन्नचित्त और त्रिनैत्र युक्त हैं।  कमल के समान सुन्दर दोनों हाथों में वे शूल और दण्ड धारण किये हुए हैं। ऐसे भगवान् बटुक भैरव को मैं बारम्बार प्रणाम करता हूँ। 
ध्यान के बाद बटुक भैरव मन्त्र  का कम से काम 108 बार जाप करें। ऐसा इकतालीस दिन तक करें।  इस अवधि में शारीरिक व मानसिक रूप से शुद्धता तथा सात्विकता रखें।  बटुक भैरव मंत्र इस प्रकार है -
ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय  कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं।
मन्त्र जप के बाद भावना करें कि बटुक भैरव ने आपकी प्रार्थना को  सुन लिया है और उनकी कृपा से आपकी विपदा दूर हो जायेगी तथा आपके जीवन में प्रसन्नता व सम्पन्नता आयेगी।  

Wednesday, 29 January 2020

(6.11.1) Ram Ramaay Namah

 रां  रामाय नमः Raam Raamaay Namah राम मंत्र - प्रसन्नता व सफलता के लिए

भगवान् राम भगवान् विष्णु के अवतार हैं।  वे नैतिकता, श्रेष्ठ गुण तथा आदर्श के प्रतीक हैं। भगवान् राम को पुरुषोत्तम कहा जाता है। वे दया के सागर हैं।  उनसे सम्बन्धित यह मंत्र अर्थात  "रां रामाय नमः " प्रसन्नता का स्रोत है तथा सभी प्रकार की बाधाओं को दूर कर जपकर्ता को उद्देश्य प्राप्ति में सफलता दिलाता है।  इस मंत्र की जप प्रक्रिया इस प्रकार है -
प्रातःकाल दैनिक कार्य से निवृत्त होकर उत्तर या पूर्व की तरफ मुख करके ऊनी आसन परबैठ जाएँ।  भगवान् राम का चित्र अपने सामने रखें।  अपनी आँखें बंद करके भगवान् राम का इस प्रकार ध्यान करें -
भगवान् राम जिन्होनें धनुष - बाण किये हुए हैं, बद्ध पद्मासन से विराजमान हैं, पीताम्बर पहने हुए हैं, जिनके प्रसन्न नयन नूतन कमलदल से स्पर्धा करते वाम भाग में विराजमान श्री सीता जी के मुख कमल से मिले हुए हैं, उन आजानुबाहु , मेघश्याम,नाना प्रकार के अलंकारों से विभूषित तथा विशाल जटाजूटधारी श्रीरामचन्द्र जी का ध्यान करे। 
इसके बाद इस मंत्र का ग्यारह माला का जप करें।  मंत्र इस प्रकार है -
रां रामाय नमः। 
मंत्र जप के बाद आँखें बन्द  करके भावना करे. कि भगवान् राम आपको प्रसन्नता और सफलता का आशीर्वाद  दे रहे हैं। 

Monday, 20 January 2020

(6.8.4) Shiva Manas Pooja

Shiva Manas Pooja  शिव मानस पूजा विधि 

वस्तुतः भगवान् को किसी वस्तु की आवश्यकता नहीं है, वे तो भक्त की भावना को देखते हैं।  संसार में ऐसे दिव्य पदार्थ उपलब्ध नहीं हैं, जिनसे पमेश्वर की पूजा की जा सके।  इसलिये पुराणों में मानस पूजा का विशेष महत्व माना गया है। भगवान्  शिव की मानसपूजा विधि इस प्रकार है -
हे दयानिधे ! हे पशुपते! हे देव ! यह रत्न निर्मित सिंहासन, शीतल जल से स्नान, नाना रत्नावलिविभूषित  दिव्य वस्त्र, कस्तूरिकागन्ध समन्वित चन्दन, जूही, चम्पा  और बिल्वपत्र से रचित पुष्पांजलि तथा धूप और दीप यह सब मानसिक (पूजोपहार ) ग्रहण कीजिये।  मैनें नवीन रत्न खण्डों से रचित सुवर्णपात्र में घृतयुक्त खीर, दूध और दधि सहित पाँच प्रकार का व्यंजन, कदलीफल, शर्बत, अनेकों शाक, कपूर से सुवासित  और स्वच्छ किया हुआ मीठा जल और ताम्बूल - ये सब मन के द्वारा ही बनाकर प्रस्तुत किये हैं; प्रभो ! कृपया इन्हें स्वीकार करें।
छत्र, दो चँवर, पंखा, निर्मल दर्पण, वीणा, भेरी, मृदंग,दुन्दुभी के वाद्य, गान और नृत्य, साष्टांग प्रणाम, नाना विधि स्तुति - ये सब मैं संकल्प से ही आपको समपर्ण करता हूँ; प्रभो ! मेरी यह पूजा ग्रहण कीजिये।  हे शम्भो ! मेरी आत्मा तुम हो, बुद्धि पार्वती जी हैं, प्राण आपके गण  हैं , शरीर आपका मन्दिर  है, सम्पूर्ण विषय -  भोग की रचना आपकी पूजा है, निंद्रा समाधि है, मेरा चलना - फिरना आपकी परिक्रमा है और सम्पूर्ण शब्द आपके स्तोत्र हैं; इस प्रकार मैं जो - जो कर्म करता हूँ, वह सब आपकी आराधना ही है। प्रभो ! मैनें हाथ, पैर, वाणी, शरीर, कर्म, कर्ण , नैत्र अथवा मन से जो भी अपराध किये हों; वे विहित हों  अथवा अविहित, उन सबको आप क्षमा कीजिये। हे करुणासागर श्री महादेव शंकर ! आपकी जय हो। 

Saturday, 21 December 2019

(6.8.3) Shiva Pooja Me Belpatra Ka Mahtva

Shiva Pooja Men Belpatra Ka Mahatva शिव पूजा में बेलपत्र का महत्व  


बेलपत्र जिसे बिल्वपत्र भी कहा जाता है, भगवान शिव को बहुत प्रिय है .इसलिए शिवपूजा में बेलपत्र का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है. बेलपत्र में त्रिदल अर्थात तीन पत्ते एक साथ जुड़े होते हैं. हालांकि बेलपत्र में तीन दल से अधिक दल भी होते हैं. परन्तु सामान्यतया तीन दल वाला बेलपत्र सरलता पूर्वक उपलब्ध हो जाता है. बेलपत्र चढाने के लाभ इस प्रकार हैं –
भगवान् शिव को बेलपत्र चढाने से सम्पन्नता आती है, आयु में वृद्धि होती है, शारीरिक व मानसिक कष्ट दूर होते हैं, सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं और परिवार में सुख शान्ति बनी रहती है.
बेलपत्र तोड़ने के नियम इस प्रकार हैं –
बेलपत्र तोड़ने से पहले और तोड़ने के बाद बेलवृक्ष को प्रणाम करना चाहिए. बेलपत्र तोड़ते समय ध्यान रखा जाये कि बेलवृक्ष को कोई नुकसान नहीं हो. बेलवृक्ष की टहनी से चुन-चुन कर केवल बेलपत्र ही तोड़ना चाहिए न कि पूरी टहनी. चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी और अमावस्या तथा सोमवार को बेलपत्र नहीं तोड़ना चाहिए. इसलिए इन तिथियों व वार को बेलपत्र चढाने के लिए एक दिन पहले ही बेलपत्र तोड़ कर रख लेना चाहिए.
बेलपत्र चढाने की विधि
बेलपत्र कटा-फटा नहीं हो और न ही उसमें कोई छेद हो. बेलपत्र चढाने से पहले उसके डंठल को तोड़ देना चाहिए. शिवलिंग पर बेलपत्र को उल्टा चढ़ाना चाहिए यानि पत्ते का चिकना भाग नीचे रहना चाहिए. पाँच, सात, ग्यारह या अधिक संख्या में बेलपत्र चढ़ाए जा सकते हैं . बेलपत्र चढाते समय कोई और मंत्र नहीं बोल सकें तो ‘ॐ नमः शिवाय’ का उच्चारण करना चाहिए. स्कन्द पुराण के अनुसार यदि नया बेलपत्र उपलब्ध नहीं हो, तो किसी दूसरे व्यक्ति के द्वारा चढ़ाए गए बेलपत्र को भी धोकर कई बार अर्पित किया जा सकता है.

Wednesday, 9 October 2019

(3.1.36) Ghar Me Pooja Sthal

Ghar me Pooja Sthal , Pooja Ghar Men Moortiyan / घर में पूजा स्थल / पूजा घर में मूर्तियाँ 

घर में पूजा स्थल की आवश्यकता और महत्व -
दैनिक पूजा - पाठ, प्रार्थना आदि के लिए पूजा स्थल विशेष महत्व  रखता है।  अपने ईष्ट देव की पूजा पाठ , प्रार्थना आदि से घर में सकारात्मक व दिव्य ऊर्जा उत्पन्न होती है जो परिवार के प्रत्येक सदस्य को रचनात्मकता से भर देती है, उसके मन में सौहार्द्र तथा समरसता का भाव निर्मित होता है।  पूजा पाठ से शारीरिक व मानसिक व्याधियाँ  शीघ्र दूर होती हैं।  समस्यायों का समाधान मिलने लगता है।
घर में पूजा स्थल कहाँ होना चाहिए -
पूजा या आराधना के लिए कक्ष / स्थल  घर के ईशान कोण (उत्तर- पूर्व )  में होना चाहिए।  घर छोटा हो और  पूजा स्थल बनाने के लिए अलग से स्थान नहीं हो तो उत्तर की तरफ वाले कमरे के ईशान कोण में पूजा स्थल बनाया जा सकता है। पूजा स्थल शयन कक्ष में भी नहीं होना चाहिए , लेकिन स्थान के अभाव  के कारण पूजा का स्थान शयन कक्ष में ही हो तो , उसको ढक  कर रखना चाहिए यानि पर्दा लगा देना चाहिए।
घर के दक्षिणी भाग  में पूजा घर नहीं बनाना चाहिये ।
घर के पूजा स्थल में मूर्तियों की संख्या और उनका नाप या आकार क्या होना चाहिए -
घर  में दो शिवलिंग , दो शंख, दो सूर्य प्रतिमा, दो गोमती चक्र, दो शालिग्राम, तीन गणेश और तीन देवी प्रतिमा का पूजन नहीं करना चाहिये।
घर के पूजा स्थल  में रखी मूर्ति एक बित्ते के बराबर नाप की होनी चाहिये।  इससे बड़ी मूर्ति घर के पूजा स्थल में नहीं रखनी चाहिये।  एक बित्ते  में बारह अँगुल होते हैं अर्थात लगभग नौ इन्च ।  (चित्र / फोटो  के लिए यह बात लागू नहीं होती है। )
अन्य महत्वपूर्ण बातें - 
(1  पूजा करते समय पूजा करने वाले का मुख उत्तर या पूर्व दिशा की ओर होना चाहिये।
(२) पूजा स्थल के आस - पास, ऊपर नीचे सफाई व शुद्धता का पूरा ध्यान रखना चाहिये।
(3 ) पूजा घर में दीपक जलायें तथा अगरबत्ती के बजाय धूप बत्ती जलायें ।  .


Saturday, 14 September 2019

(6.4.2) Ham Hanumate Rudraatmakaay Hum Phat

Ham Hanumate Rudraatmakaay Hum Phat (हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट )

यदि आपके जीवन में कठिनाइयाँ, रुकावटें, बाधाऐं हो तो उनसे मुक्ति पाने तथा सुखी जीवन व्यतीत करने के लिए श्री राम भक्त हनुमान जी के मंत्र का जप करना चाहिये।  जप के लिये पूर्व या उत्तर की ओर मुहँ करके ऊनी आसान पर बैठ जायें, अपने सामने हनुमान जी का चित्र रख लें और हनुमान जी का ध्यान करें।  ध्यान इस प्रकार है - 
वानरराज हनुमान, जिन्होंने बायें हाथ में दुश्मनों को विदीर्ण करने वाला पर्वत ले रखा है तथा दायें हाथ में विशुद्ध टंक (पत्थर तोड़ने की टाँकी )धारण कर रखी है। सुवर्ण के समान कान्तिमान, कुण्डल मण्डित वानर राज हनुमान जी को मैं प्रणाम करता हूँ तथा उनका ध्यान करता हूँ और प्रार्थना करता हूँ कि वे मेरी विपदा को दूर करें। 
ध्यान के बाद इस मन्त्र का प्रतिदिन 108 बार जप करें। ऐसा कम से कम 41 दिन तक करें। मंत्र इस प्रकार है -
हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट

Thursday, 5 September 2019

(6.2.2) Sankatnaashan Ganesh Stotra


Sankat Naashan Ganesh Stotra संकटनाशन गणेश स्तोत्र

नारद उवाच
प्रणम्य शिरसा देवं गौरीपुत्रं विनायकम्।
भक्तावासं स्मरेन्नित्यमायु: कामार्थ सिद्धये ।।1।।  
प्रथमं वक्रतुण्डं च एकदन्तं द्वितीयकम्।
तृतीयं कृष्णपिङ्गाक्षं  गजवक्त्रं चतुर्थकम् ।।2।। 
लम्बोदरं पंचमं च षष्ठं विकटमेव च।
सप्तमं विघ्नराजं च धूम्रवर्णं तथाष्टमम् ।।3।। 
नवमं भालचन्द्रं च दशमं तु विनायकम्।
एकादशं गणपतिं द्वादशं तु गजाननम्।।4।। 
द्वादशैतानि नामानि त्रिसंध्यं य: पठेन्नर:
न च विघ्नभयं तस्य सर्वसिद्धिकरं प्रभो  ।।5।।  
विद्यार्थी लभते विद्यां, धनार्थी लभते धनम्।
पुत्रार्थी लभते पुत्रान् मोक्षार्थी लभते गतिम्।।6।। 
जपेद् गणपति स्तोत्रं षडभिर्मासैः फलं लभेत्। 
संवत्सरेण सिद्धिं च लभेत नात्र संशयः।।7।।  
अष्टभ्यो ब्राह्मणेभ्यश्च लिखित्वा यः समर्पयेत्। 
तस्य विद्या भवेत् सर्वा गणेशस्य प्रसादतः।।8।।  
संकट नाशन गणेश स्तोत्रं सम्पूर्णम |

हिंदी अर्थ – नारद जी बोले – सिर झुका कर गौरीपुत्र विनायक देव को प्रणाम करके प्रतिदिन आयु, अभीष्ट मनोरथ और धन आदि प्रयोजनों की सिद्धि के लिये भक्तावास गणेश जी का स्मरण करे |
पहला नाम वक्रतुण्ड है, दूसरा एकदन्त है, तीसरा कृष्ण पिंगाक्ष है, चौथा गजवक्त्र है, पाँचवाँ लम्बोदर है, छठा विकट, सातवाँ विघ्नराजेन्द्र, आठवाँ धूम्रवर्ण है, नवाँ भालचन्द्र, दसवाँ विनायक, ग्यारहवाँ गणपति और बारहवाँ गजानन है | जो व्यक्ति प्रातः, दोपहर और सायं – तीनों संध्याओं के समय प्रतिदिन इन बारह नामों का पाठ करता है, उसे किसी प्रकार के विघ्न का भय नहीं रहता है, यह नाम स्मरण सभी प्रकार की सिद्धियाँ देने वाला है |
फल श्रुति – इस स्तोत्र का पाठ करने वाले विद्याभिलाषी को विद्या, धनाभिलाषी को धन, पुत्र पाने की इच्छा करने वाले को पुत्र और मोक्ष चाहने वाले को मोक्षगति प्राप्त होती है | इस गणपति स्तोत्र का छ: मास तक जप करने से इच्छित फल प्राप्त हो जाता है तथा एक वर्ष में पूर्ण सिद्धि प्राप्त हो जाती है – इसमें कोई सन्देह नहीं है | जो व्यक्ति इस स्तोत्र को लिख कर आठ ब्राह्मणों को लिख कर देता है, गणेश जी की कृपा से उसे सब प्रकार की विद्या प्राप्त हो जाती है |